नैरोबी, 12 मई (आईएएनएस)। अफ्रीकी नेताओं ने मंगलवार को एक महाद्वीपीय पहल को तेज करने पर सहमति जताई, जिसका उद्देश्य जरूरी स्वास्थ्य उत्पादों जैसे दवाओं और वैक्सीन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है। उन्होंने ये बातें केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित अफ्रीका फॉरवर्ड समिट के उद्घाटन समारोह से पहले एक बैठक के दौरान कही।
नए लॉन्च किए गए ‘अफ्रीका इनिशिएटिव फॉर मेडिकल एक्सेस एंड मैन्युफैक्चरिंग (एआईएम 2030)’ पर एक उच्च स्तरीय बैठक में केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा कि अफ्रीका को बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमता से जुड़ी कमियों को दूर करना होगा, ताकि एआईएम 2030 को तेजी से लागू किया जा सके।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि इन कमियों को दूर करना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे महाद्वीप दवाओं और वैक्सीन में आत्मनिर्भर बन सकेगा, जो खतरनाक बीमारियों से प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए बेहद जरूरी है।
अफ्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ ने कहा कि मजबूत स्थानीय दवा निर्माण व्यवस्था बनने से अफ्रीका की स्वास्थ्य सुरक्षा, मानव अधिकार और विकास के नतीजे बेहतर होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अफ्रीकी देशों को नए और रचनात्मक फंडिंग मॉडल अपनाने चाहिए, ताकि जरूरी स्वास्थ्य उत्पादों का स्थानीय उत्पादन बढ़े और क्षेत्रीय बाजारों में आपूर्ति मजबूत करने के लिए टिकाऊ सप्लाई चेन बनाई जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अफ्रीका क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद याकूब जनाबी ने कहा कि कोविड-19 महामारी से मिले सबक के बाद अब अफ्रीका अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को ज्यादा मजबूत बना रहा है, खासकर स्थानीय उत्पादन बढ़ाकर।
जनाबी के अनुसार एआईएम 2030 अफ्रीकी देशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की एक बड़ी प्रतिबद्धता है, जिसका लक्ष्य है स्वास्थ्य उत्पादों का स्थानीय निर्माण दोगुना करना, सभी लोगों को समान रूप से पहुंच सुनिश्चित करना, और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाना, जो अफ्रीका के ‘एजेंडा 2063’ के अनुरूप है।
विश्व बैंक और अफ्रीकी संघ के सहयोग से चल रही इस पहल का मकसद है कि अफ्रीका अपने स्वास्थ्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाए और वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों के बीच लोगों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
समिट के अंत में विश्व नेताओं और अफ्रीकी राष्ट्राध्यक्षों ने मिलकर एक नए वित्तीय ढांचे की जरूरत पर जोर दिया, ताकि अफ्रीका की आर्थिक क्षमता को पूरी तरह से इस्तेमाल किया जा सके।

