गांधीनगर, 14 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का कृषि क्षेत्र परंपरागत खेती से आधुनिक, टेक्नोलॉजी आधारित और निर्यातोन्मुखी खेती की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। गुजरात में भी परंपरागत फसलों के अलावा बागवानी फसलों और मूल्यवर्धित खेती को निरंतर प्रोत्साहन मिलने से किसानों की आय बढ़ी है।
राज्य का विशाल समुद्री तट नारियल की खेती के लिए अनुकूल होने के कारण उसका सीधा लाभ किसानों को मिलता है। टेंडर कोकोनट की बढ़ती मांग और समुद्री तट के विस्तार के कारण गुजरात ने नारियल की खेती में रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज कराया है।
पिछले दो वर्षों में राज्य में टेंडर कोकोनट के उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आज किसान वार्षिक लगभग 26 करोड़ नारियल का उत्पादन करते हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि गुजरात बागवानी क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। राज्य के लगभग 28,000 हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल की खेती की जाती है, जिसमें गिर सोमनाथ, जूनागढ, भावनगर, वलसाड, नवसारी, कच्छ और द्वारका जिलों का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में टेंडर कोकोनट की औसत उत्पादकता लगभग 9.26 हजार प्रति हेक्टेयर है।
गुजरात के किसान बागवानी फसलों तथा मूल्यवर्धन की ओर मुड़ें, इसके लिए गुजरात सरकार के बागवानी विभाग द्वारा प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। साथ ही किसानों पर आर्थिक बोझ न आए इसके लिए नारियल की बुवाई पर सरकार द्वारा 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है।
इसके अतिरिक्त, मल्चिंग तथा इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट जैसी पद्धतियों के उपयोग से फसल की उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिले, इस उद्देश्य से उसमें भी सहायता दी जाती है। इसी प्रकार, बागवानी विभाग के अधीनस्थ नर्सरी से नारियल की ऊंची किस्म, वामन किस्म तथा हाइब्रिड किस्मों के अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे मिल जाते हैं। गुजरात ग्रीन रिवॉल्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा टपक सिंचाई पद्धति में सहायता दी जाती है।
चोरवाड से उना तक का समुद्र तटवर्ती क्षेत्र ‘लीली नाघेर’ (हरियाले क्षेत्र) के रूप में जाना जाता है, जहां पिछले दो वर्ष में रोगस व्हाइटफ्लाई (रोगस सफेद मक्खी) के प्रकोप से किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। यद्यपि गुजरात सरकार के मार्गदर्शन व किसानों के प्रयासों से स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है।
गिर सोमनाथ जिले के सूत्रापाडा के युवा किसान दिनेश सोलंकी ने इस समस्या के निवारण के लिए देसी उपाय आजमाकर नारियल के उत्पादन के साथ अपनी आय में भी वृद्धि की है। उन्होंने 1,000 लीटर पानी में गुड़ व गिर गाय के दूध का मिश्रण करके व्हाइटफ्लाई को नष्ट करने में सफलता प्राप्त की है।
पहले उनके खेत में वर्ष में केवल 1,000 से 1,500 नारियल का उत्पादन होता था, परंतु इस प्रयोग के बाद यह उत्पादन बढ़कर वार्षिक 8,000 से 10,000 नारियल के करीब दर्ज हुआ है। आज उनकी वार्षिक आय 12 से 15 लाख रुपए तक पहुंची है, और उनकी सफलता देखकर अन्य किसान भी यह पद्धति अपनाने को प्रेरित हुए हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार का आगामी वर्षों में नारियल बुवाई क्षेत्र 70,000 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। साथ ही वर्जिन कोकोनट ऑयल, कोकोनट पाउडर जैसे नारियल आधारित उत्पादों तथा प्रोसेसिंग द्वारा उनके मूल्यवर्धन एवं निर्यात बाजारों में प्रवेश के लिए भी प्रयास चल रहे हैं। इसके चलते गुजरात आगामी समय में नारियल आधारित उद्योगों के वैश्विक हब के रूप में उभर आएगा।

