नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। अर्थशास्त्री और भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील, भारत की अर्थव्यवस्था, विदेशी संकटों, राहुल गांधी के आरोपों और कांग्रेस शासित राज्यों की आर्थिक स्थिति पर न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ विस्तार से बातचीत की। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और देश इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल : प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘ऑस्टेरिटी कॉल,’ यानी मितव्ययिता की अपील, पर आपका क्या कहना है?
जवाब : इस समय दुनिया तीन बड़े भू-राजनीतिक संकटों से जूझ रही है। पहला पश्चिम एशिया का संघर्ष, दूसरा रूस-यूक्रेन युद्ध और तीसरा अमेरिका-चीन के बीच कमोडिटी प्राइस को लेकर तनाव। इन सभी का असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ा है। भारत अपने पेट्रोल-डीजल की जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जबकि सोने की खपत का 99 प्रतिशत हिस्सा भी बाहर से आता है। वित्तीय वर्ष 2026 में केवल कच्चे तेल और सोने का कुल आयात लगभग 18 लाख करोड़ रुपए का रहा। अगर 140 करोड़ भारतीय केवल 10 प्रतिशत खपत कम कर दें, तो करीब 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए का विदेशी मुद्रा बहिर्गमन रोका जा सकता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने लोगों से संयम और समझदारी अपनाने की अपील की है।
सवाल : क्या प्रधानमंत्री मान रहे हैं कि देश आर्थिक संकट में है?
जवाब : ऐसा बिल्कुल नहीं है। दुनिया के संकटों का असर हर देश पर पड़ रहा है, लेकिन भारत लगातार मजबूत हुआ है। पिछले 12 वर्षों में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। 8 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। 40 करोड़ से अधिक लोगों को मुद्रा योजना के तहत लोन दिया गया। स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसी योजनाओं ने आर्थिक मजबूती दी है। प्रधानमंत्री ने देश को मजबूत वित्तीय आधार दिया है, और इसलिए भारत वैश्विक संकटों के बावजूद मजबूती से खड़ा है।
सवाल : बाहरी आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है?
जवाब : भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत है और घबराने जैसी कोई बात नहीं है। भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल का रिजर्व और 45 दिनों का एलपीजी गैस रिजर्व मौजूद है। अगर देशवासी केवल 10 प्रतिशत खपत कम कर दें तो विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हो सकती है। 140 करोड़ भारतीय मिलकर इन वैश्विक चुनौतियों को हराने में सक्षम हैं और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
सवाल : तेल और गैस सप्लाई के मोर्चे पर भारत कितना सुरक्षित है?
जवाब : भारत पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में है। दुनिया भर में जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, तब भी भारतीय झंडे वाले जहाज भारत तक गैस और कच्चा तेल पहुंचाते रहे। यह भारत की मजबूत विदेश नीति है। भारत को तेल और गैस की सप्लाई को लेकर किसी तरह की समस्या नहीं है।
सवाल : प्रधानमंत्री ने अपने काफिले को भी छोटा किया है। इसे आप कितना महत्वपूर्ण मानते हैं?
जवाब : प्रधानमंत्री जो बात कहते हैं, पहले खुद उसे लागू करते हैं। प्रधानमंत्री ने खुद अपने उपयोग में आयात-निर्भर चीजों में कटौती शुरू की है। अगर प्रधानमंत्री दो गाड़ियों में सफर कर सकते हैं, तो यह पूरे देश के लिए उदाहरण है। विपक्षी नेताओं को भी कम गाड़ियों में चलें और हर महीने विदेश घूमने जाने की बजाय देश के पर्यटन स्थलों पर जाएं। लोग ओमान, मस्कट, स्विट्जरलैंड और इटली जाने की बजाय जैसलमेर, बाड़मेर, शिलांग और केरल घूमने जाएं।
सवाल : क्या चीन और रूस के साथ भारत के अच्छे रिश्ते इस संकट से निकलने में मदद करेंगे?
जवाब : भारत हर देश से संबंध रखता है, लेकिन ‘नेशन फर्स्ट’ यानी राष्ट्र सर्वोपरि नीति के साथ। भारत किसी के दबाव में नहीं झुकता। रूस से पुराने संबंध हैं, अमेरिका से भी मजबूत रिश्ते हैं। यूरोपीय संघ के साथ एफटीए साइन किया गया है और पश्चिम एशियाई देशों से भी अच्छे संबंध हैं। भारत जहां से 140 करोड़ लोगों को अधिक फायदा मिलेगा, वहां संबंध मजबूत रखता है।
सवाल: भारतीय अर्थव्यवस्था की तुलना दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं से कैसे करेंगे?
जवाब : रुपए के हिसाब से भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। डॉलर के हिसाब से थोड़ी गिरावट आई है, जिसका कारण रुपए-डॉलर विनिमय दर पर अल्पकालिक दबाव है। जैसे ही यह दबाव कम होगा, भारत फिर तेजी से आगे बढ़ेगा और अगले वर्ष तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
सवाल : क्या कृषि और उद्योग मिलकर देश को इस संकट से बाहर निकाल सकते हैं?
जवाब : जब भी देश पर संकट आया है, किसानों ने देश को संभाला है। सेवा क्षेत्र, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि, ये तीनों भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ हैं और मिलकर हर चुनौती का सामना करेंगे।
सवाल : क्या भविष्य में लॉकडाउन जैसी स्थिति की कोई संभावना है?
जवाब : ऐसा कोई सवाल ही नहीं है। विपक्ष के कुछ नेता भ्रम फैला रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं। क्या पिछले दो महीनों में किसी को पेट्रोल, डीजल या गैस की कमी महसूस हुई? लोग सोना खरीद सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने केवल यह अपील की है कि अगर संभव हो तो एक साल तक सोना खरीदने का फैसला टाल दें ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।
सवाल : प्रधानमंत्री ने वर्क फ्रॉम होम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की भी अपील की है। इसका कितना फायदा होगा?
जवाब : अगर लोग सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करें, एक दिन वर्क फ्रॉम होम करें, और एक दिन वर्चुअल मीटिंग करें, तो भारत वैश्विक संकटों के आर्थिक असर को काफी हद तक कम कर सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक प्रतिशत भी असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
सवाल : कांग्रेस शासित राज्य इस मितव्ययिता अभियान का समर्थन नहीं कर रहे हैं। क्या कहना चाहेंगे?
जवाब : यह राजनीति का नहीं बल्कि देशहित का मुद्दा है। जो लोग इस पर राजनीति कर रहे हैं, वे 140 करोड़ लोगों के संकल्प के खिलाफ खड़े हैं। राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादव से अपील करता हूं कि वे खुद उदाहरण पेश करें और मेट्रो व पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें।
सवाल : राहुल गांधी प्रधानमंत्री की अपील को आर्थिक संकट बता रहे हैं। आपकी प्रतिक्रिया?
जवाब : देश किसी संकट में नहीं है। भारत आज भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। वित्तीय वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। विदेशी मुद्रा भंडार 690 बिलियन डॉलर है और राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है। राहुल गांधी से कहना चाहूंगा कि हर बात का विरोध करना गलत है और भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ कहना देश का अपमान है। राहुल गांधी, सकारात्मक राजनीति करें और देशहित में सरकार के साथ खड़े रहें।
सवाल : कांग्रेस शासित राज्यों, खासकर कर्नाटक की आर्थिक स्थिति पर आपका क्या कहना है?
जवाब : कांग्रेस ने कर्नाटक की आर्थिक हालत खराब कर दी है। कांग्रेस ने ऐसे वादे किए जो आर्थिक रूप से संभव ही नहीं थे। कर्नाटक में इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि खर्च और शहरी विकास ठप हो गया है। यही हाल हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना जैसे अन्य कांग्रेस-शासित राज्यों का भी है।
सवाल : राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर क्या कहना चाहेंगे?
जवाब : राहुल गांधी को देशहित में एक साल तक विदेश में छुट्टियां मनाने से बचना चाहिए। राहुल गांधी को यह भी बताना चाहिए कि पिछले 10-15 वर्षों में उनकी विदेशी यात्राओं पर कितनी विदेशी मुद्रा खर्च हुई।
सवाल : क्या कांग्रेस में राहुल गांधी के नेतृत्व के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है?
जवाब : कांग्रेस लगातार तीसरी बार असम चुनाव हार गई। बंगाल में पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं बचा। तमिलनाडु में सहयोगियों के सहारे राजनीति करने के बाद भी कांग्रेस अपने सहयोगियों को ही धोखा दे रही है। राहुल गांधी अवसरवादी राजनीति करते हैं।
सवाल: असम में भाजपा की बड़ी जीत के बाद पवन खेड़ा को किस तरह के परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं?
जवाब : पवन खेड़ा ने बहुत बड़ा पाप किया है। उन्होंने एक गैर-राजनीतिक महिला पर बेबुनियाद और झूठे आरोप लगाए। भारत की न्यायिक व्यवस्था में इस तरह के कृत्य के लिए जो भी सजा निर्धारित है, वह उन्हें जरूर मिलेगी। उन्होंने भारत के लोकतंत्र और राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है। ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
सवाल : क्या पवन खेड़ा के आरोपों के पीछे राहुल गांधी का हाथ था?
जवाब : मेरे पास इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है, इसलिए बिना तथ्यों के मैं किसी का नाम नहीं ले सकता। लेकिन जो भी लोग इसके पीछे होंगे, उन्हें भारत की न्यायिक व्यवस्था के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

