बेंगलुरु, 15 मई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के सांसद और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शुक्रवार को सिद्धारमैया सरकार के स्कूलों में हिजाब की अनुमति देने के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना और तुष्टीकरण से प्रेरित फैसला बताया, जिससे छात्रों के बीच धार्मिक आधार पर विभाजन पैदा हो सकता है।
एक प्रेस बयान में इस मुद्दे पर वैश्विक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए बोम्मई ने दावा किया कि सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों में महिलाएं और लड़कियां अपने रोजमर्रा के जीवन में हिजाब पहनने से धीरे-धीरे दूर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में कर्नाटक में ऐसा कानून लाना, जो लड़कियों को पीछे धकेलता हो, अनुचित है।
भाजपा संसद ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने खुद ही कानूनी तरीकों से अनावश्यक विवाद पैदा किया है और कहा कि ऐसे काम एक जिम्मेदार और सभ्य सरकार को शोभा नहीं देते। यह जिम्मेदार शासन नहीं है। यह एक बेहद गैर जिम्मेदार फैसला है।
बोम्मई ने कहा कि सरकार ने यह आदेश तब जारी किया, जब इसकी कोई सार्वजनिक मांग नहीं थी और शिक्षा व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से बच्चों के बीच धर्म के आधार पर भेदभाव और अशांति फैल सकती है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “सरकार ने यह आदेश तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा देने और धार्मिक आधार पर छात्रों के बीच विभाजन पैदा करने के लिए जारी किया है। यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो भविष्य में छात्रों के बीच होने वाली किसी भी चिंता और भेदभाव के लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।”
बोम्मई ने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल के दौरान सरकार ने 1980 के स्कूल यूनिफॉर्म नियमों के तहत एक स्पष्टीकरण आदेश जारी किया था, जिसे बाद में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी सही ठहराया था। उन्होंने बताया कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंचा था, जहां इस पर विभाजित फैसला आया था और यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
उन्होंने कहा, “भले ही यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, फिर भी सरकार एक बार फिर बच्चों के बीच विभाजन और चिंता का माहौल पैदा कर रही है।”
कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार पर शिक्षा व्यवस्था के कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए बोम्मई ने कहा कि राज्य सरकार के पास कोई स्पष्ट शिक्षा नीति नहीं है और उसे शिक्षकों की कमी तथा शैक्षणिक स्तर में गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, “सरकार के पास ध्यान देने के लिए कई जरूरी काम हैं। इसके बजाय उसने ऐसा आदेश जारी करना चुना है। सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने अचानक यह फैसला क्यों लिया है। तुष्टीकरण की राजनीति के अलावा इस कदम में और कुछ नजर नहीं आता।”
यह याद किया जा सकता है कि कर्नाटक सरकार ने बुधवार को स्कूलों और कॉलेजों की यूनिफॉर्म को लेकर 5 फरवरी 2022 के अपने आदेश को वापस ले लिया और नए दिशानिर्देश जारी किए, जिनमें राज्यभर के शिक्षण संस्थानों में छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ सीमित पारंपरिक और आस्था-आधारित प्रतीक पहनने की अनुमति दी गई। इसके तहत हिजाब, पवित्र धागा, पगड़ी और अन्य धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति दी गई, जिससे एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

