अहमदाबाद, 15 मई (आईएएनएस)। अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने शुक्रवार को बताया कि पिछले छह वर्षों में उसके अंगदान कार्यक्रम के तहत कुल 1,032 अंग और ऊतकों का दान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह अस्पताल भारत में शव-आधारित अंगदान के प्रमुख केंद्रों में से एक के रूप में उभर रहा है।
ताजा मामले में मेहसाणा जिले के पेशे से ड्राइवर 29 वर्षीय धर्मेंद्र दरबार को 14 मई को ब्रेन डेड घोषित किया गया। वह 4 मई को कड़ी के पास हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
हादसे के बाद से उनका इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा था। मेडिसिन विभाग के डॉ. जीतू पारिख और उनकी टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इसके बाद आम नागरिक पी.एस. पटेल और परिवार के सदस्य महेंद्रभाई झाला तथा लालसिंह झाला की काउंसलिंग के बाद धर्मेंद्र की पत्नी, भाई और बहन ने अंगदान के लिए सहमति दी।
अधिकारियों ने बताया कि परिवार के इस फैसले से लिवर और दो किडनी दान किए गए, जिससे तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकेगा।
सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट राकेश जोशी ने बताया कि पिछले छह वर्षों में अस्पताल में 240 अंगदाताओं ने अंगदान किया है।
उन्होंने कहा, ”पिछले छह वर्षों में 240 दानदाताओं से 794 अंग प्राप्त हुए। इसके अलावा 194 नेत्रदान और 44 स्किन डोनेशन हुए, जिससे कुल 238 ऊतक प्राप्त हुए। इस तरह कार्यक्रम के तहत कुल 1,032 अंग और ऊतक दान किए गए हैं।”
डॉ. जोशी ने बताया कि अब तक अस्पताल में 443 किडनी, 214 लिवर, 76 हृदय, 34 फेफड़े, 19 अग्न्याशय, 6 हाथ और 2 छोटी आंतों का दान किया जा चुका है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिए अलग-अलग अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवन रक्षक प्रत्यारोपण संभव हो पाए हैं और मृतक अंगदान को लेकर जागरूकता भी लगातार बढ़ रही है।
एक अन्य फैसले में राज्य सरकार ने सिद्धपुर डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 12,000 रुपए से बढ़ाकर 20,160 रुपए कर दिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि यह फैसला इंटर्नशिप के दौरान युवा डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे काम को सम्मान देने के लिए लिया गया है।
उन्होंने कहा,”कॉलेज के डीन और प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और स्वास्थ्य विभाग से सरकारी मानकों के अनुरूप स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की थी, जिसके बाद इस संशोधन को मंजूरी दी गई।”
अधिकारियों के अनुसार, बढ़ा हुआ स्टाइपेंड उन इंटर्न डॉक्टरों को सहयोग देने के लिए है, जो प्रशिक्षण के दौरान लगातार क्लिनिकल ड्यूटी और मरीजों की देखभाल में लगे रहते हैं।

