मणिपुर: बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए तेज हुई कोशिशें

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इंफाल, 16 मई (आईएएनएस)। मणिपुर में विभिन्न समुदायों से जुड़े समूहों द्वारा बंधक बनाए गए लोगों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ), राज्य सरकार के अधिकारियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार बातचीत जारी है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, कांगपोकपी और सेनापति जिलों में विभिन्न समूहों द्वारा बंधक बनाए गए कुकी और नागा समुदाय के 38 से अधिक लोगों में से 30 लोगों को गुरुवार और शुक्रवार को रिहा करा लिया गया। यह रिहाई प्रशासन और सामुदायिक नेताओं के लगातार प्रयासों के बाद संभव हो सकी।

बताया गया है कि महिलाओं समेत इन लोगों को 13 मई की सुबह कांगपोकपी जिले में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा तीन बैपटिस्ट चर्च नेताओं की हत्या और चार अन्य लोगों को घायल किए जाने के बाद अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया था।

उसी शाम मणिपुर के नोने जिले में एक नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि उसकी पत्नी घायल हो गई थी। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि अभी भी बंधक बने बाकी लोगों की “सुरक्षित रिहाई” के लिए हरसंभव प्रयास जारी हैं।

इसी बीच, कूकी इन्पी मणिपुर सहित कई आदिवासी संगठनों ने शनिवार को मणिपुर के पहाड़ी जिलों के कुकी-जो बहुल इलाकों में प्रदर्शन आयोजित किए। इन प्रदर्शनों का उद्देश्य निर्दोष कुकी नागरिकों को कथित तौर पर अवैध रूप से बंधक बनाए जाने के विरोध में आवाज उठाना था।

केआईएम के निर्देश पर कांगपोकपी जिले में जनजातीय एकता समिति (सीओटीयू) के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। वहीं, चुराचांदपुर जिले में प्रभावित परिवारों के समर्थन और बंधक संकट के विरोध में एक विशाल रैली निकाली गई।

केआईएम के सूचना एवं प्रचार सचिव जंघाओलन हाओकिप ने कहा कि शनिवार के आंदोलन की मुख्य मांगों में सभी बचे हुए बंधकों की तत्काल, सुरक्षित और बिना शर्त रिहाई शामिल है। साथ ही संगठन द्वारा पहले सरकार को सौंपे गए मांगपत्र को जल्द लागू करने की मांग भी की गई।

इन मांगों में कुकी-जो समुदाय के खिलाफ कथित उत्पीड़न, लक्षित हिंसा और असुरक्षा के मुद्दे उठाए गए हैं। साथ ही तीन कुकी-जो चर्च नेताओं की हत्या के मामले में न्याय की मांग भी की गई है।

हाओकिप ने बयान में कहा, “बंधकों के परिवारों को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ रही है। माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चे और अन्य परिजन लगातार भय, अनिश्चितता और मानसिक तनाव में जी रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर कोई भरोसा नहीं है।”

बयान में यह भी कहा गया कि यदि प्रशासन ने निर्णायक हस्तक्षेप कर बंधकों की रिहाई सुनिश्चित नहीं की, तो इससे कानून व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है तथा क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता और बढ़ सकती है।

हाओकिप ने यह भी घोषणा की कि बंधक संकट जारी रहने और शेष बंधकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा देखते हुए कूकी इन्पी मणिपुर द्वारा बुलाए गए 48 घंटे के पूर्ण बंद को 15 मई की मध्यरात्रि से अगले 48 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया है।