केरल में यूडीएफ सरकार के शपथ लेने से पहले कैबिनेट पर बातचीत का आखिरी दौर जारी

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तिरुवनंतपुरम, 17 मई (आईएएनएस)। केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को होना है, ऐसे में कैबिनेट गठन को लेकर चर्चाओं का आखिरी दौर रविवार को खत्म होने वाला है।

मंत्रियों की अंतिम सूची दोपहर करीब 2 बजे राज्यपाल को सौंपे जाने की उम्मीद है, जबकि गठबंधन के सहयोगियों और नेतृत्व के बीच सुबह से ही गहन विचार-विमर्श जारी है।

कांग्रेस की प्रतिनिधि और केरल की प्रभारी दीपा दासमुंशी ने पुष्टि की कि चर्चाएं आगे बढ़ रही हैं और मंत्रालय के स्वरूप पर अंतिम फैसला आज बाद में होने की उम्मीद है। नई सरकार 21 सदस्यों वाली कैबिनेट के साथ कार्यभार संभालेगी, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।

राजनीतिक सूत्रों का संकेत है कि कांग्रेस को मुख्यमंत्री पद सहित 11 मंत्री पद मिलने की संभावना है। हालांकि, कांग्रेस के कई उम्मीदवारों पर मोटे तौर पर सहमति बन गई है, लेकिन गठबंधन के सहयोगियों के साथ उनके मंत्री पद के प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चाएं अभी भी जारी हैं।

कांग्रेस खेमे से जिन नामों को लगभग अंतिम रूप दिया जा चुका है, उनमें वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला शामिल हैं, जिनके गृह मंत्रालय का प्रभार संभालने की उम्मीद है, इनके अलावा सन्नी जोसेफ, के. मुरलीधरन, तिरुवनचूर राधाकृष्णन, ए.पी अनिल कुमार, पीसी विष्णुनाथ, एम. लिजू, चांडी ओमन और बिंदु कृष्णा के नाम भी शामिल हैं।

सूत्रों का कहना है कि कुछ बचे हुए पदों को लेकर चर्चाएं जारी हैं। यह भी पता चला है कि सतीशन खुद वित्त मंत्रालय जैसा अहम विभाग अपने पास रख सकते हैं। हालांकि, विभागों का बंटवारा तभी अंतिम रूप लेगा, जब कैबिनेट की सूची को औपचारिक मंजूरी मिल जाएगी।

इस बीच, गठबंधन की सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को नई सरकार में पांच मंत्री पद मिलने की संभावना है। जिन नामों पर प्राथमिकता से विचार किया जा रहा है, उनमें पी.के कुन्हालीकुट्टी, केएम शाजी, एन. शमसुद्दीन और परक्कल अब्दुल्ला शामिल हैं।

हालांकि, खबरों के मुताबिक पी.के बशीर को शामिल किए जाने की संभावना को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं, और पार्टी का एक धड़ा उन्हें पदोन्नत किए जाने पर अपनी आपत्तियां जता रहा है। सोमवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले, कैबिनेट की अंतिम संरचना से नव-निर्वाचित यूडीएफ सरकार के भीतर सत्ता-साझेदारी की व्यवस्था की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।