मुंबई, 17 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता आनंद परांजपे ने शिवसेना में शामिल के बाद से सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस राजनीतिक बदलाव पर शिवसेना ने स्पष्ट किया कि परांजपे स्वेच्छा से पार्टी में आए हैं और एनसीपी में चल रही अंदरूनी अस्थिरता उनके इस फैसले की मुख्य वजह है।
शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “एनसीपी नेता आनंद परांजपे ने खुद शिवसेना में शामिल होने की इच्छा जताई थी। शिवसेना ने उनसे संपर्क नहीं किया था। वे अपनी मर्जी से पार्टी में शामिल होना चाहते थे।”
वाघमारे ने आगे बताया कि एनसीपी में वर्तमान समय में नेतृत्व और कामकाज को लेकर गहरे असमंजस और अनियमितताएं चल रही हैं। परांजपे का शिवसेना में आना इन्हीं परिस्थितियों का परिणाम है।
इससे पहले आनंद परांजपे ने एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “शरद पवार हमेशा मेरे लिए सम्माननीय थे, हैं और आगे भी रहेंगे। शिवसेना में नए प्रवास की शुरुआत के दौरान मैं उनका आशीर्वाद लेने गया था। मुलाकात व्यक्तिगत रूप से हुई।”
परांजपे ने बताया कि शरद पवार ने उन्हें मेहनत करने और जिस पार्टी में गए हैं, वहां अच्छे से काम करने की सलाह दी।
शिवसेना पर एनसीपी को तोड़ने के आरोपों का जवाब देते हुए परांजपे ने कहा, “शिवसेना के वरिष्ठ मंत्री उदय सामंत ने पहले ही अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है। उन्होंने बताया कि एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार से चर्चा के बाद ही उनका शिवसेना में प्रवेश हुआ है। ऐसे में दोनों पार्टियों के बीच कोई तकरार नहीं है।”
परांजपे ने स्पष्ट किया, “मैंने शिवसेना में किसी पद की मांग नहीं की है। मैंने एकनाथ शिंदे से यही विनती की थी कि मुझे संगठन में काम करने की जिम्मेदारी दी जाए। मुझे संगठन में ज्यादा रुचि है। मैं पार्टी कार्यकर्ता के रूप में संगठन के विस्तार के लिए काम करूंगा।”

