नीदरलैंड दौरे के बाद स्वीडन रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, पीएम रॉब जेटन ने एयरपोर्ट पर दी खास अंदाज में विदाई

0
5

एम्स्टर्डम, 17 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड की यात्रा पूरी करने के बाद रव‍िवार को स्वीडन के लिए रवाना हुए। इस दौरान नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने एयरपोर्ट पर पीएम मोदी को गले लगाकर व‍िदाई दी। यह दोनों देशों के रिश्तों में खास अपनापन और गर्मजोशी का संकेत माना जा रहा है।

इससे पहले दिन में पीएम मोदी और रॉब जेटन ने अफ्सलाउटडाइक डैम का दौरा किया। यह डैम पानी के प्रबंधन, बाढ़ से सुरक्षा और मीठे पानी के भंडारण में डच विशेषज्ञता का बड़ा उदाहरण माना जाता है।

दौरे के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, “पानी के संसाधनों के क्षेत्र में नीदरलैंड्स ने बेहद शानदार काम किया है। पूरी दुनिया उनसे बहुत कुछ सीख सकती है। आज सुबह मुझे अफ्सलाउटडाइक प्रोजेक्ट देखने और इसकी खास बातें समझने का मौका मिला। मैं प्रधानमंत्री रॉब जेटन का धन्यवाद करता हूं कि वे मेरे साथ यहां आए।”

उन्होंने कहा क‍ि हम भारत में सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और अंदरूनी जलमार्गों के विस्तार के लिए आधुनिक तकनीक लाने पर काम कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में बताया कि शनिवार को पीएम मोदी ने द हेग में रॉब जेटन के आधिकारिक आवास ‘कैटशुइसल’ में उनसे मुलाकात की। भारत के विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच भारत-नीदरलैंड संबंधों को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे, साझा मूल्यों और मजबूत होते सहयोग को देखते हुए नेताओं ने रिश्तों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा देने का फैसला किया।

साथ ही दोनों देशों ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, नई और महत्वपूर्ण तकनीक, समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप अपनाने पर सहमति जताई।

दोनों नेताओं ने यह भी माना कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था डच कंपनियों के लिए अच्छे व्यापारिक अवसर लेकर आई है।

पानी, कृषि और स्वास्थ्य (डब्‍ल्‍यूएएच) के क्षेत्र में सहयोग की अहमियत को रेखांकित करते हुए दोनों देशों ने बड़े जल परियोजनाओं पर मिलकर काम करने और साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

सांस्कृतिक रिश्तों की बात करते हुए पीएम मोदी ने 11वीं सदी की चोलकालीन ताम्रपट्टिकाओं को वापस लौटाने के लिए नीदरलैंड सरकार का धन्यवाद किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने लाइडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बीच सहयोग का भी स्वागत किया, जिससे इन ऐतिहासिक धरोहरों पर और बेहतर जानकारी मिल सकेगी।

आधिकारिक बातचीत के बाद तकनीक, हरित ऊर्जा, व्यापार, आवागमन, डब्‍ल्‍यूएएच, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्रों में 14 समझौते और एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।