असम में 1250 वर्ग किमी अतिक्रमित जमीन वापस लेगी सरकार: सीएम सरमा

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गुवाहाटी, 17 मई (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को राज्य में अतिक्रमित जमीन को वापस लेने के लिए एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जों के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान के तहत जमीनी स्तर पर कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सरकार राज्यभर में अवैध रूप से कब्जाई गई विशाल भूमि को मुक्त कराने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है।

उन्होंने लिखा, “एनडीए 3.0 असम में 1250 वर्ग किलोमीटर से अधिक अतिक्रमित भूमि को पुनः प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस वादे को पूरा करने के लिए हमारी टीम पहले से ही जमीन पर काम कर रही है।”

सीएम सरमा ने अपने पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें पीले रंग की जेसीबी मशीनें ढांचों को ध्वस्त करती और लकड़ी तथा टिन-शेड के मलबे को हटाती नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई किसी ग्रामीण पहाड़ी इलाके में चल रही थी।

मुख्यमंत्री सरमा इससे पहले भी कई बार अपनी सरकार के अतिक्रमण हटाओ अभियान को तेज करने की बात कह चुके हैं। दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से एक दिन पहले, 11 मई को उन्होंने कहा था कि असम की “जमीन, पहचान और भविष्य” उनकी सरकार के लिए “गैर-समझौतावादी” मुद्दे हैं।

उन्होंने यह भी ऐलान किया था कि एनडीए सरकार के नए कार्यकाल में अतिक्रमण विरोधी अभियानों को और तेज किया जाएगा तथा करीब 5 लाख बीघा जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा।

सीएम सरमा ने एक्स पर लिखा था, “असम की जमीन, पहचान और भविष्य पर कोई समझौता नहीं होगा। 1.5 लाख बीघा जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद एनडीए 3.0 अब 5 लाख और बीघा जमीन जनता के लिए वापस लेने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। क्योंकि हमारे लिए ‘जाति, माटी, भेती’ सबसे पहले है।”

‘जाति, माटी, भेती’ का नारा- जिसका अर्थ समुदाय, भूमि और मातृभूमि से है- असम में भाजपा सरकार के राजनीतिक संदेश का प्रमुख हिस्सा रहा है, खासकर पहचान और भूमि अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर।

इस बीच मुख्यमंत्री सरमा ने असम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में किए गए हर वादे को सरकार पूरा करने का प्रयास करेगी।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “यूसीसी हमारे चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा है। इसलिए सिर्फ यूसीसी ही नहीं, बल्कि घोषणा पत्र में किए गए हर वादे को हम 100 प्रतिशत लागू करने की कोशिश करेंगे।”

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।

प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होने वाला एक समान कानूनी ढांचा लागू करना है।