अमेरिका ने चीन के समक्ष उठाया पंचेन लामा का मुद्दा

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वाशिंगटन, 19 मई (आईएएनएस)। अमेरिका ने चीन से तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक नेताओं में से एक पंचेन लामा की रिहाई का मुद्दा उठाया है। अपील की है कि उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। यह मांग उनके लापता होने के 31 साल पूरे होने पर उठाई गई है। उस समय पंचेन लामा की उम्र सिर्फ छह साल थी।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक बयान में कहा कि दलाई लामा ने गेदुन चोएकी न्यिमा को तिब्बती बौद्ध धर्म का नेता घोषित किया था। ऐलान किए जाने के कुछ ही दिनों बाद चीनी अधिकारियों ने उन्हें और उनके परिवार को गायब कर दिया था।

उन्होंने कहा, “18 मई को तिब्बती धार्मिक नेता पंचेन लामा, गेदुन चोएकी न्यिमा के लापता होने की 31वीं बरसी थी। दलाई लामा द्वारा उन्हें मान्यता दिए जाने के कुछ दिनों बाद ही चीनी प्रशासन उन्हें और उनके परिवार को अपने साथ ले गया। उस समय वह सिर्फ छह साल के थे।”

अमेरिका ने एक बार फिर तिब्बत में चीन की नीतियों और तिब्बती धार्मिक मामलों में उसके हस्तक्षेप की आलोचना की है।

टॉमी पिगॉट ने कहा, “चीनी अधिकारियों को तुरंत गेदुन चोएकी न्यिमा और उनके परिवार को रिहा करना चाहिए और तिब्बतियों या चीन में किसी भी अन्य समुदाय को उनके धार्मिक विश्वासों के कारण प्रताड़ित करना बंद करना चाहिए।”

अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी दोहराया कि वह तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता और उनकी सांस्कृतिक के साथ भाषाई पहचान की रक्षा का समर्थन करता है।

अमेरिका ने यह भी कहा कि तिब्बती बौद्ध समुदाय को अपने धार्मिक नेताओं का चयन खुद करने की आजादी होनी चाहिए और इसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

पिगॉट ने कहा, “तिब्बती बौद्धों को, अन्य सभी धार्मिक समुदायों की तरह ही दलाई लामा या पंचेन लामा सरीखे आध्यात्मिक गुरुओं को चुनने का अधिकार होना चाहिए। इसमें किसी सरकार या पार्टी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।”

पंचेन लामा को तिब्बती बौद्ध धर्म में दलाई लामा के बाद दूसरा सबसे बड़ा आध्यात्मिक पद माना जाता है।

चीन लंबे समय से तिब्बत और वहां के बौद्ध संस्थानों पर कड़ा नियंत्रण बनाए हुए है। 1995 में चीन ने दलाई लामा ने गेदुन चोएकी न्यिमा को पंचेन लामा मानने से इनकार कर दिया था और उसकी जगह ग्यैनकैन नोरबू को सरकारी समर्थन के साथ पंचेन लामा घोषित किया था।