उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, सीएम धामी ने जताया दुख

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देहरादून, 19 मई (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को निधन हो गया। देहरादून के मैक्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 91 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे। वह सेना से राजनीति में आए थे और अपनी सादगी, अनुशासन तथा ईमानदार छवि के लिए जाने जाते थे।

उन्होंने दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उनका पहला कार्यकाल वर्ष 2007 से 2009 तक और दूसरा कार्यकाल 2011 से 2012 तक रहा। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और राज्य में पारदर्शी एवं अनुशासित प्रशासन स्थापित करने के लिए कई अहम कदम उठाए।

उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर दुख जताया है।

सीएम धामी ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, “उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।”

उन्होंने आगे लिखा, “राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”

धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने दुख जताते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, “हम सभी के लिए यह अत्यंत दुःखद और अपूरणीय क्षति है कि उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री, प्रखर राष्ट्रभक्त एवं आदर्श जनसेवक श्रद्धेय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (से. नि.) अब हमारे बीच नहीं रहे। एक वीर सैनिक से लेकर मुख्यमंत्री पद तक की उनकी गौरवपूर्ण यात्रा राष्ट्रसेवा, अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण रही। सेना अधिकारी, सांसद, विधायक एवं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने सदैव जनहित को सर्वोपरि रखा और अपने कार्यों से सार्वजनिक जीवन की मर्यादा को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।”

उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में प्रदेश में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय कार्य आज भी विकास की मजबूत नींव के रूप में देखे जाते हैं। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के प्रति उनका समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और दृढ़ प्रशासनिक क्षमता ने उन्हें जनता के बीच अत्यंत सम्माननीय स्थान दिलाया। वह केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा की जीवंत प्रेरणा थे। उनका संपूर्ण जीवन हम सभी के लिए आदर्श एवं मार्गदर्शक बना रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिजनों और असंख्य शुभचिंतकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।