केरल में हार के बाद विजयन की पार्टी के नेताओं ने की तीखी आलोचना, गोविंदन ने भी उठाए सवाल

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तिरुवनंतपुरम, 20 मई (आईएएनएस)। केरल के हालिया राजनीतिक इतिहास में पहली बार, सीपीआई(एम) के कभी बेहद नियंत्रित माने जाने वाले अंदरूनी हलके अब खुले गुस्से, हताशा और कड़े आत्ममंथन के अखाड़े बन गए हैं। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और पार्टी के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन को जिला समिति की बैठकों में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

पार्टी के अंदरूनी लोगों को जिस बात ने सबसे ज्यादा चौंकाया है, वह है विजयन पर किए गए हमलों की तीव्रता और उनका निजी स्वरूप। विजयन केरल के एकमात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने लगभग एक दशक तक पार्टी और सरकार पर बिना किसी रोक-टोक के अधिकार के साथ राज किया।

तिरुवनंतपुरम जिला सचिवालय की बैठक में नेताओं ने खुले तौर पर विजयन के अहंकार, आम लोगों से दूरी बनाने वाली छवि और टकराव वाले हावभाव को आम मतदाताओं को पार्टी से दूर करने के लिए जिम्मेदार ठहराया।

बताया जा रहा है कि कई सदस्यों का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री की कार्यशैली ऐसी हो गई थी जिससे आम लोग खुद को जोड़ ही नहीं पा रहे थे जबकि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आत्मविश्वास के बजाय बढ़ती हुई अधीरता और असहिष्णुता ही ज्यादा झलकती थी।

सबसे तीखी और शायद राजनीतिक रूप से सबसे प्रतीकात्मक टिप्पणी खुद गोविंदन की ओर से आई। विजयन को जिस बड़े पैमाने पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, उसे समझाने की कोशिश करते हुए गोविंदन ने कथित तौर पर कहा कि उनके अपने बेटे ने भी अपने पिता के हावभाव और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाए थे।

नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के आसपास के माहौल की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों के लिए वहां तक पहुंच पाना लगभग असंभव हो गया था।

इस बात पर भी सवाल उठाए गए कि जब कई वरिष्ठ नेताओं और यहां तक कि राज्य समिति के सदस्यों को चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित कर दिया गया था, तब विजयन को अकेले ही पार्टी के उम्र संबंधी नियमों से छूट क्यों दी गई।

विजयन के कैबिनेट सहयोगी एम.बी. राजेश और वीणा जॉर्ज भी कड़ी आलोचना के घेरे में हैं। नेताओं ने उनके प्रदर्शन और मंत्री के तौर पर उनके कामकाज को पार्टी के लिए एक बड़ी कमजोरी बताया।

सीपीआई(एम) के अंदरूनी हलकों में, वरिष्ठ नेता निजी तौर पर यह स्वीकार करते हैं कि विजयन और गोविंदन को संगठन के भीतर से पहले कभी भी इतनी सीधी, व्यापक और भावनात्मक रूप से आवेशित आलोचना का सामना नहीं करना पड़ा था।

एक ऐसी पार्टी के लिए जो लंबे समय से अपने कड़े अनुशासन और असहमति को सख्ती से नियंत्रित करने के लिए जानी जाती रही है, हार के बाद हुई ये बैठकें अब गहरे असंतोष को उजागर कर रही हैं और शायद जवाबदेही व पार्टी के भविष्य की दिशा को लेकर एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत का संकेत दे रही हैं।