चेन्नई, 20 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु का बिजली क्षेत्र भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है। राज्य विद्युत बोर्ड पर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बताया जा रहा है। इस बीच मंत्री निर्मल कुमार ने पिछली डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके कार्यकाल में हुई अनियमितताओं और कानूनी उल्लंघनों ने मौजूदा संकट को जन्म दिया।
मंत्री निर्मल कुमार ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़े कई अनियमितताओं और गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं, जिनमें से कई की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान टीवीके सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
उन्होंने कहा कि लाखों उपभोक्ताओं को सेवा देने वाला बिजली बोर्ड वर्षों की प्रशासनिक विफलताओं और वित्तीय कुप्रबंधन के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मंत्री के अनुसार, पिछली सरकार के दौरान कथित अनियमितताओं की वजह से यह संस्थान धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया।
निर्मल कुमार ने कहा, “बिजली बोर्ड पर इस समय लाखों करोड़ रुपये का कर्ज है। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि संगठन का पूर्ण पुनर्गठन करना अपरिहार्य हो गया है।”
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली बोर्ड को फिर से वित्तीय रूप से मजबूत और कुशल संस्था बनाने के लिए हर संभव विकल्प पर विचार कर रही है, ताकि जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
मंत्री ने दावा किया कि बोर्ड के पुनर्गठन और उसकी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त अवसर और संरचनात्मक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। सरकार का उद्देश्य केवल कर्ज का बोझ कम करना नहीं, बल्कि बिजली बोर्ड के कामकाज को आधुनिक बनाना और उसकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना भी है।
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली बोर्ड को फिर से खड़ा करने और उसकी कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।
स्थिति की गंभीरता पर जोर देते हुए निर्मल कुमार ने कहा कि वर्तमान सरकार बिजली क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और पिछली सरकार की कथित गलतियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार तमिलनाडु के उपभोक्ताओं को निर्बाध और बेहतर बिजली सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

