Monday, July 13, 2026
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तमिलनाडु कैबिनेट विस्तार: शपथ के बीच कांग्रेस मंत्री करने लगे जय जयकार, राज्यपाल ने दोबारा कराई प्रक्रिया

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चेन्नई, 21 मई (आईएएनएस)। गुरुवार को तमिलनाडु कैबिनेट विस्तार समारोह के दौरान एक अप्रत्याशित रुकावट ने सबका ध्यान खींचा, जब राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने चेन्नई के लोक भवन में पद की शपथ लेते समय निर्धारित नियम से भटकने पर कांग्रेस के मंत्री एस. राजेश कुमार को टोका।

कांग्रेस विधायक दल के नेता और किल्लियूर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक राजेश कुमार, तमिलनाडु वेट्री कजगम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार के पहले विस्तार के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार में शामिल किए गए मंत्रियों में से एक थे।

उनके शामिल होने से कई दशकों के बाद राज्य मंत्रिमंडल में कांग्रेस पार्टी की वापसी भी हुई।

समारोह के दौरान राजेश कुमार ने अपने सामने रखे आधिकारिक दस्तावेज से निर्धारित शपथ पढ़ना शुरू किया। इस दौरान वे कुछ देर के लिए स्वीकृत पाठ से हट गए और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, के. कामराज, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की जय-जयकार करने लगे। इस पर राज्यपाल आर्लेकर ने तुरंत हस्तक्षेप किया।

यह देखते हुए कि ये टिप्पणियां संवैधानिक शपथ का हिस्सा नहीं थीं, राज्यपाल ने कुमार को बीच में ही रोक दिया और टिप्पणी की, “यह आपकी शपथ का हिस्सा नहीं है।”

इस हस्तक्षेप के बाद एक अधिकारी तुरंत मनोनीत मंत्री के पास गया और उनके सामने रखे स्वीकृत पाठ की ओर इशारा किया।

इसके बाद राजेश कुमार ने प्रक्रिया फिर से शुरू की और निर्धारित प्रारूप के अनुसार शपथ पूरी की।

बाद में समारोह में सत्ताधारी टीवीके से संबंधित कुछ नए शपथ लेने वाले मंत्रियों की ओर से भी इसी तरह के राजनीतिक उत्साह का प्रदर्शन देखने को मिला।

सलेम दक्षिण के विधायक ए. विजय तमिलन पार्थिबन ने मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री विजय के समर्थन में नारा लगाकर अपनी शपथ पूरी की। उन्होंने घोषणा की, ‘वाजगा थलाइवर, वलर्गा तमिल’ (नेता अमर रहें, तमिल समृद्ध हो)।

एक अन्य मामले में, श्रीपेरुम्बुदूर के टीवीके विधायक थेन्नारासु ने पार्टी नेतृत्व और संगठन, दोनों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए अपनी शपथ पूरी की।

हालांकि शपथ ग्रहण समारोह काफी हद तक सुचारू रूप से संपन्न हुआ, लेकिन इन सहज राजनीतिक नारों ने कुछ समय के लिए औपचारिक संवैधानिक कार्यवाही से ध्यान हटाकर पार्टी की पहचान और राजनीतिक प्रतीकों के प्रदर्शन की ओर मोड़ दिया।