वैश्विक संघर्षों में बढ़ रही नागरिकों की मौत, यूएन ने जताई चिंता

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संयुक्त राष्ट्र, 21 मई (आईएएनएस)। पिछले साल दुनियाभर में चल रहे सशस्त्र संघर्षों में हर 14 मिनट में एक आम नागरिक की मौत हुई, ऐसा संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक मानवीय प्रतिक्रिया इकाई के प्रमुख ने कहा है।

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) की संचालन और वकालत निदेशक एडेम वोसोरनू ने बुधवार (स्थानीय समय) को सुरक्षा परिषद में नागरिकों की सुरक्षा पर हुई खुली बहस के दौरान यह आंकड़े बताए।

उन्होंने कहा, “हमें पता है कि असली नुकसान इससे कहीं ज्यादा है, चाहे वह डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो हो, सूडान, यूक्रेन या फिर अन्य जगह हो।

समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इसी से जुड़े एक बयान में इंटर-एजेंसी स्टैंडिंग कमेटी के प्रमुखों ने बुधवार को कहा कि दुनियाभर में संघर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानून का खुला उल्लंघन बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा, “हर संघर्ष में आम लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं, घायल हो रहे हैं और अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।”

यौन हिंसा को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और लड़कियों पर पड़ रहा है और उनकी जिंदगी पूरी तरह तबाह हो रही है। घर, स्कूल, पूजा स्थल, अस्पताल यहां तक कि मातृत्व वार्ड भी नष्ट या क्षतिग्रस्त किए जा रहे हैं। साथ ही पानी की व्यवस्था, परिवहन नेटवर्क, बाजार और खाद्य उत्पादन जैसी आम नागरिकों की चीजें भी प्रभावित हो रही हैं।

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि युद्धों की वजह से भूख और अकाल जैसी स्थिति फैल रही है, जो कई बार घेराबंदी और जानबूझकर भोजन रोकने की रणनीति से जुड़ी होती है।

उन्होंने यह भी बताया कि मानवीय मदद करने वाले लोगों पर भी बहुत बड़ा असर पड़ा है। पिछले तीन वर्षों में 1000 से ज्यादा सहायताकर्मियों की मौत हो चुकी है।

उन्होंने कहा क‍ि युद्धों के भी नियम होते हैं, जो सभी पक्षों पर लागू होते हैं। समस्या कानून की कमी नहीं है। समस्या है इन नियमों को लगातार लागू न करना, जवाबदेही की कमी और गंभीर अपराधों के सामने भी कार्रवाई न होना।