Saturday, May 23, 2026
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उत्तर प्रदेश: विश्वविद्यालयों में लागू होगा ड्रेस कोड, छात्रों और शिक्षकों ने फैसले का किया स्वागत

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नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म कोड लागू करने के राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश के बाद शिक्षा जगत में इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। शिक्षकों, छात्रों और जनप्रतिनिधियों ने इसे अनुशासन, समानता और बेहतर शैक्षणिक वातावरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

मुजफ्फरनगर स्थित शिव हर्ष किसान पीजी कॉलेज की प्राचार्य रीना पाठक ने सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि कॉलेज स्तर पर पहले से ही ड्रेस कोड लागू किया जा चुका है और कई छात्र-छात्राएं यूनिफॉर्म पहनकर कॉलेज आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों में अनुशासन बढ़ता है और शिक्षा संस्थानों का वातावरण अधिक व्यवस्थित बनता है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम निश्चित रूप से सराहनीय है और इससे विद्यार्थियों में एक नई सकारात्मक सोच विकसित होगी।

वहीं, मुजफ्फरनगर के एक छात्र ने भी ड्रेस कोड को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसे बहुत अच्छे तरीके से लागू किया गया है। छात्र का कहना है कि यूनिफॉर्म से कॉलेज में अनुशासन बेहतर होगा और सभी विद्यार्थियों में समानता की भावना पैदा होगी। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई छात्र पहनावे के आधार पर खुद को अलग या कमतर महसूस न करे।

हरदोई में रजनी तिवारी ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में पहले से ही यूनिफॉर्म व्यवस्था लागू है और अब इसे विश्वविद्यालयों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा और सराहनीय कदम है, जिससे विद्यार्थियों में अनुशासन और एकरूपता आएगी। साथ ही इससे शिक्षा संस्थानों की पहचान भी मजबूत होगी।

गाजीपुर पीजी कॉलेज के प्राचार्य राघवेंद्र पांडे ने कहा कि ड्रेस कोड लागू होने से विद्यार्थियों और संस्थानों दोनों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि यूनिफॉर्म के जरिए यह आसानी से पहचाना जा सकेगा कि कौन छात्र किस विश्वविद्यालय या कॉलेज से संबंधित है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे उन छात्रों को सबसे अधिक राहत मिलेगी जो रोज नए कपड़े पहनने में सक्षम नहीं होते। यूनिफॉर्म से आर्थिक और सामाजिक भेदभाव की भावना भी कम होगी।

छात्रों ने भी सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यूनिफॉर्म लागू होने से रोज नए कपड़े पहनने की चिंता समाप्त होगी और सभी विद्यार्थियों की एक समान पहचान बनेगी। विद्यार्थियों का मानना है कि यह निर्णय शिक्षा संस्थानों में बेहतर माहौल तैयार करने में मददगार साबित होगा।