नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। असम विधानसभा में सोमवार को भाजपा सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर दिया। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी विधेयक पर विरोध करते हुए इसे लैंगिक न्याय से कोसों दूर बताया है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि समान नागरिक संहिता बिल्कुल भी एक समान नहीं है। यह जनजातीय समुदायों को यूसीसी के दायरे से पूरी तरह बाहर रखता है। अनुच्छेद 29 के तहत हर समुदाय को अपनी संस्कृति की रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन सिर्फ आदिवासियों की स्वायत्तता की ही रक्षा क्यों की जा रही है। यह एक ऐसा कानून थोपा जा रहा है जिसे कोई नहीं चाहता। संविधान सभा ने किसी अनिवार्य यूसीसी की कल्पना नहीं की थी।
ओवैसी ने लिखा कि इस्लाम में कोई भी किसी वारिस को विरासत से वंचित नहीं कर सकता। कोई भी ऐसी वसीयत नहीं लिख सकता जिससे अपनी पूरी संपत्ति सिर्फ एक बेटे को दे दी जाए या बेटी को विरासत से वंचित कर दिया जाए। यह यूसीसी किसी को भी वसीयत लिखने और अपनी बेटियों को उनके उचित हिस्से से वंचित करने की अनुमति देता है। यह विधेयक लैंगिक न्याय से कोसों दूर है।
कांग्रेस विधायक जॉय प्रकाश दास ने यूसीसी बिल पर कहा कि यूसीसी को लेकर हमारा रुख बिल्कुल साफ है। हम इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि असम में जो यूसीसी लाया जा रहा है, उसमें यह कहा गया है कि आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा। अगर उन्हें बाहर रखा जाता है तो यह सवाल उठता है कि क्या यह अच्छा है या बुरा। अगर यह अच्छा है तो फिर यह आदिवासियों को लाभ क्यों नहीं पहुंचा रहा है। “
कांग्रेस विधायक रेकिबुद्दीन अहमद ने कहा कि हम इसका विरोध करेंगे और हम इसका जोरदार विरोध करेंगे। इसमें एक या दो प्रावधान ऐसे हैं, जो एक अलग मामला है और शायद कुछ खास समूहों के हित में हो सकते हैं, हालांकि यह यूसीसी एक बहुत बड़ी पहले से सोची-समझी चाल है। यह एक समुदाय को खत्म करने की एक योजना है।

