Monday, May 25, 2026
SGSU Advertisement
Home अंतर्राष्ट्रीय पेइचिंग में सजी रवींद्रनाथ टैगोर की स्मृति में सांस्कृतिक संध्या

पेइचिंग में सजी रवींद्रनाथ टैगोर की स्मृति में सांस्कृतिक संध्या

0
8

बीजिंग, 25 मई (आईएएनएस)। पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर एक भावपूर्ण और भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। 22 मई को आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में कविता, संगीत और कला के माध्यम से गुरुदेव की अमर साहित्यिक और मानवीय विरासत को याद किया गया।

इस अवसर पर चीनी, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय समुदायों के विद्वान, कलाकार, छात्र और साहित्य प्रेमी एक साथ जुटे। कार्यक्रम ने न केवल टैगोर की रचनात्मकता को श्रद्धांजलि दी, बल्कि भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक संवाद और मित्रता की भावना को भी सशक्त किया।

कार्यक्रम की शुरुआत भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी द्वारा गुरुदेव की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। उपस्थित अतिथियों ने भी श्रद्धा और सम्मान के साथ गुरुदेव को नमन किया।

संध्या के दौरान प्रो. डोंग यूचेन और प्रो. लियू जियान ने टैगोर की साहित्यिक, दार्शनिक और सभ्यतागत विरासत पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि टैगोर केवल एक महान कवि नहीं थे, बल्कि वे मानवता, शिक्षा, शांति और सभ्यताओं के बीच संवाद के वैश्विक प्रतीक भी थे। उनके विचार आज भी दुनिया को जोड़ने और संस्कृतियों को करीब लाने की प्रेरणा देते हैं।

कार्यक्रम का सांस्कृतिक भाग विशेष रूप से आकर्षक रहा। बंगाली समुदाय की देबपर्णा और सब्यसाची ने भावपूर्ण रवींद्र संगीत प्रस्तुत कर माहौल को भावनाओं से भर दिया। वहीं, मिस्टर वांग छिंगंग ने टैगोर की कविताओं का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

चीनी कलाकारों और छात्रों की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया। हपेई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा प्रस्तुत डांस-ड्रामा ने टैगोर की रचनात्मक दुनिया को मंच पर जीवंत कर दिया, जबकि फायरफ्लाई पोएटिक थिएटर ट्रूप की संगीत प्रस्तुति ने कार्यक्रम में कलात्मक सौंदर्य का नया रंग भर दिया।

पूरी शाम गुरुदेव टैगोर की उस भावना से सराबोर रही, जो सीमाओं से परे मानवता, सौंदर्य और सांस्कृतिक एकता की बात करती है। यह आयोजन इस बात का जीवंत उदाहरण बना कि कला और साहित्य किस तरह अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों को एक सूत्र में बांध सकते हैं।

कार्यक्रम का समापन पारंपरिक बंगाली जलपान के साथ आत्मीय और गर्मजोशी भरे माहौल में हुआ, जहां मेहमानों ने संवाद, संगीत और साझा सांस्कृतिक अनुभवों का आनंद लिया।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)