Tuesday, May 26, 2026
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अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी : रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ-अशुभ समय

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नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भगवान विष्णु को अति प्रिय पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) चल रहा है। मास का 12वां दिन यानी ज्येष्ठ शुक्ल की द्वादशी तिथि 27 मई 2026 (बुधवार) को है। इसी दिन रामलक्ष्मण द्वादशी मनाई जाएगी, जिसे चंपक द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण को समर्पित है।

इस वर्ष पुरुषोत्तम मास में पड़ने के कारण इसे अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी कहा जाता है। तिथि पर रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो कार्य सिद्धि और शुभ परिणामों के लिए विशेष माना जाता है। हालांकि, भद्रा की छाया भी रहेगी, इसलिए शुभ कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए।

पुरुषोत्तम मास और द्वादशी तिथि दोनों भगवान विष्णु को प्रिय हैं। इस दिन व्रत रखने, राम-लक्ष्मण की पूजा करने और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत से सुख, सौभाग्य, उन्नति और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बुधवार को सूर्योदय 5 बजकर 25 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 12 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 3 बजकर 51 मिनट पर और चंद्रास्त 28 मई की सुबह 3 बजकर 1 मिनट पर होगा। बुधवार को एकादशी तिथि सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसके बाद द्वादशी तिथि रहेगा। नक्षत्र चित्रा और योग व्यतीपात रहेगा।

बुधवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 3 मिनट से 4 बजकर 44 मिनट तक, प्रातः संध्या: सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 25 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 36 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 10 मिनट से 7 बजकर 31 मिनट तक और निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 56 मिनट तक और रवि योग सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक, यमगंड सुबह 7 बजकर 8 मिनट से 8 बजकर 52 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। साथ ही भद्रा की छाया सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगी।