हैदराबाद, 29 मई (आईएएनएस)। तेलंगाना के सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने शुक्रवार को दावा किया कि रबी (यासांगी) सीजन में धान खरीद के मामले में तेलंगाना देश के सभी राज्यों में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राज्य अब तक 60 लाख टन धान की खरीद कर चुका है, जो अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश में लगभग 24 लाख टन, तमिलनाडु में 11-12 लाख टन, महाराष्ट्र में 3 लाख टन और केरल में करीब 2 लाख टन धान की खरीद हुई है, जबकि तेलंगाना 60 लाख टन का आंकड़ा पार कर चुका है।
उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना देश में सबसे सफल धान खरीद अभियान चला रहा है और यासांगी सीजन में राज्य निर्विवाद रूप से राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है।
उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना भारत की खाद्यान्न खरीद प्रणाली की रीढ़ बन चुका है। उनके अनुसार, वर्तमान यासांगी सीजन में पूरे देश में खरीदे गए धान का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले तेलंगाना से आया है। खरीद प्रक्रिया पूरी होने तक यह आंकड़ा 75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
मंत्री ने कहा कि तेलंगाना न केवल धान खरीद में सबसे आगे है, बल्कि केंद्रीय पूल के तहत भारतीय खाद्य निगम को चावल उपलब्ध कराने में भी देश का नंबर-1 राज्य है।
उन्होंने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि खरीद, परिवहन, भुगतान और लॉजिस्टिक प्रबंधन के जिस स्तर पर काम किया गया है, वैसा स्वतंत्र भारत में किसी राज्य ने नहीं किया।
उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि केंद्र सरकार ने तेलंगाना से अधिकतम 52 लाख टन धान खरीदने पर सहमति जताई थी, लेकिन राज्य पहले ही 60 लाख टन का आंकड़ा पार कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह किसानों की रिकॉर्ड उत्पादन क्षमता और राज्य की किसान हितैषी नीतियों का प्रमाण है।
मंत्री के अनुसार, वर्ष 2025-26 के यासांगी सीजन में 64.36 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती हुई, जिससे लगभग 141 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से पहले खरीद प्रक्रिया को तेज गति से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
केंद्र की खरीद नीति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद तेलंगाना में धान उत्पादन लगातार बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद एफसीआई के माध्यम से केंद्र द्वारा स्वीकार किए जाने वाले चावल की मात्रा कम की जा रही है। इस मुद्दे को मुख्यमंत्री और उन्होंने कई बार केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है।
खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए राज्य सरकार ने 8,575 खरीद केंद्र स्थापित किए हैं। साथ ही करीब 13,000 परिवहन वाहनों की तैनाती की गई है और खरीद, परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स कार्यों के लिए दो लाख से अधिक कर्मियों को लगाया गया है।
उन्होंने बताया कि किसानों के खातों में अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के रूप में 11,050 करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं। वहीं खरीफ और यासांगी दोनों सीजन को मिलाकर केएमएस 2025-26 के दौरान खरीद और किसान भुगतान से संबंधित गतिविधियों का कुल मूल्य लगभग 39,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
हाल ही में हुई बेमौसम बारिश का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने किसानों को नुकसान से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए। विशेष व्यवस्था के तहत बारिश से भीगे 10,214 टन धान को उबले चावल (बॉयल्ड राइस) मिलों तक पहुंचाया गया, जिससे प्रभावित किसानों को बिना किसी परेशानी के एमएसपी का लाभ मिल सका।
उन्होंने कहा, “सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खराब मौसम के कारण किसी भी किसान को नुकसान न उठाना पड़े और खरीद प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी रहे।”

