सिंगापुर, 30 मई (आईएएनएस)। भारत के रक्षा मंत्रालय के सचिव राजेश कुमार सिंह ने यूरोपियन एक्सर्टनल एक्शन सर्विस यानी यूरोपीय बाह्य कार्रवाई सेवा (ईईएएस) की महासचिव बेलेन मार्टिनिज कॉर्नबोनेल और यूरोपीय संघ सैन्य समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एनरिको बर्दुआनी के साथ बातचीत की। तीन दिवसीय संवाद सम्मेलन शुक्रवार को शुरू हुआ।
रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी दी। बताया कि इस बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाया गया। चर्चा में साझा सुरक्षा हितों और रक्षा तथा रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।
शुक्रवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) की मिलिट्री कमेटी के चेयरमैन एडमिरल ज्यूसेपे कैवो ड्रैगन और अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पैपारो से भी मुलाकात की थी। इस दौरान सैन्य सहयोग बढ़ाने, रणनीतिक बातचीत को मजबूत करने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने और नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई।
रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय ने एक्स पर ज्यूसेपे से हुई मुलाकात पर लिखा, “रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने एसएलडी-26 के दौरान नाटो मिलिट्री कमेटी के चेयरमैन एडमिरल ज्यूसेपे कैवो ड्रैगन से बातचीत की। चर्चा का मुख्य फोकस रणनीतिक संवाद को मजबूत करना और बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार साझा करना था। इस बातचीत ने बड़े बहुपक्षीय रक्षा संगठनों के साथ रचनात्मक सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत किया।”
वहीं, पैपारो से बातचीत में सैन्य सहयोग मजबूत करने, इंडो-पैसिफिक में साझेदारी बढ़ाने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई थी। इससे भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
सिंगापुर में आयोजित हो रहे शांगरी-ला डायलॉग में कई देशों के रक्षा मंत्री, सैन्य प्रमुख, और नीति निर्माता शामिल होते हैं। यहां बड़े स्तर पर चर्चा सत्रों के साथ-साथ अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय बैठकें भी हो रही हैं। इस मंच पर एशिया-प्रशांत, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट और अन्य क्षेत्रों के नीति-निर्माता क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और उनसे निपटने की रणनीतियों पर चर्चा करते हैं।
शांगरी-ला डायलॉग के दौरान राजेश कुमार सिंह ने कई प्रमुख थिंक टैंक और अकादमिक विशेषज्ञों से भी बातचीत की। चर्चा का फोकस इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने, रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने और नई तकनीकों में साझेदारी पर रहा।
गुरुवार को राजेश कुमार सिंह ने सिंगापुर सशस्त्र बलों की डिजिटल एंड इंटेलिजेंस सर्विस के डिजिटल ऑपरेशंस टेक्नोलॉजी सेंटर (डीओटीसी) का भी दौरा किया था। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरे से सिंगापुर की उन्नत डिजिटल और तकनीकी क्षमताओं को समझने का मौका मिला और आधुनिक युद्ध से जुड़े नए क्षेत्रों में भारतीय सशस्त्र बलों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
शांगरी-ला डायलॉग एशिया का प्रमुख रक्षा एवं सुरक्षा शिखर सम्मेलन है, जिसे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) प्रतिवर्ष सिंगापुर में आयोजित करता है। इसे ‘एशिया सुरक्षा शिखर सम्मेलन’ भी कहा जाता है।

