Sunday, May 31, 2026
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शी चिनफिंग का लेख ‘भविष्योन्मुखी योजना और भविष्य के उद्योगों का विकास’ प्रकाशित होगा

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बीजिंग, 31 मई (आईएएनएस)। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का “भविष्योन्मुखी योजना और भविष्य के उद्योगों का विकास” शीर्षक लेख 1 जून को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) केंद्रीय समिति की प्रमुख पत्रिका ‘छ्यूशी जर्नल’ के इस वर्ष के 11वें अंक में प्रकाशित होगा।

लेख में कहा गया है कि भविष्य के उद्योगों का विकास और उनका पोषण करना विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त करने, विकास की पहल को अपने हाथ में रखने, नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों को विकसित करने, आधुनिक औद्योगिक प्रणाली के निर्माण तथा लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह लोगों के सर्वांगीण विकास और समाज की समग्र प्रगति को भी बढ़ावा देगा।

लेख के अनुसार, हाल के वर्षों में सीपीसी केंद्रीय समिति ने भविष्य के उद्योगों के विकास को अत्यधिक महत्व दिया है। रणनीतिक योजना को मजबूत किया गया है और नीतिगत समर्थन बढ़ाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है। लेख में कहा गया कि नई यात्रा में, चीनी लोगों को एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण और चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की रणनीतिक ऊंचाई पर खड़े रहना होगा, वस्तुनिष्ठ परिस्थितियों को आधार बनाकर, अपने तुलनात्मक लाभों का उपयोग करते हुए, स्थिरता बनाए रखते हुए प्रगति की तलाश करने और चरणबद्ध तरीके से उद्योगों को विकसित करने के सिद्धांत का पालन करते हुए, अपने देश के भविष्य के उद्योगों के विकास में निरंतर नए नवाचारों को बढ़ावा देना होगा।

लेख में समग्र योजना और समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। इसमें कहा गया है कि भविष्य के उद्योग दूरदर्शी, रणनीतिक और परिवर्तनकारी प्रकृति के होते हैं, इसलिए इनके विकास के लिए वैज्ञानिक योजना और प्रभावी समन्वय आवश्यक है। विशेष रूप से क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव-विनिर्माण और अन्य उभरते क्षेत्रों के विकास की दिशा को सही ढंग से समझते हुए लक्षित नीतियां लागू की जानी चाहिए।

लेख में तकनीकी नवाचार को भविष्य के उद्योगों के विकास का प्रमुख आधार बताया गया है। इसमें कहा गया है कि तकनीकी क्षेत्र में होने वाली महत्वपूर्ण प्रगतियां भविष्य के उद्योगों के विकास की गति, दायरा और गहराई को निर्धारित करती हैं। इसलिए प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण और मूलभूत प्रौद्योगिकियों के विकास को तेज करना, तकनीकी नेतृत्व क्षमता को मजबूत बनाना तथा बुनियादी अनुसंधान को बढ़ावा देना आवश्यक है। साथ ही, वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों के व्यावहारिक उपयोग और उनके औद्योगिक रूपांतरण में तेजी लाने की जरूरत है।

लेख में उद्यमों की अग्रणी भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि उद्यम नवाचार के प्रमुख वाहक हैं और कई उभरते उद्योगों का विकास उद्यमों की निरंतर तकनीकी उपलब्धियों का परिणाम है। इसलिए विभिन्न नवाचार संसाधनों को उद्यमों की ओर केंद्रित किया जाना चाहिए तथा उन्नत मूल प्रौद्योगिकियों और मजबूत नवाचार क्षमता वाले अग्रणी प्रौद्योगिकी उद्यमों एवं उच्च-तकनीकी कंपनियों को सक्रिय रूप से विकसित किया जाना चाहिए।

लेख में अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है। इसके तहत राजकोषीय और कर संबंधी नीतियों में सुधार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वित्त का विकास तथा सरकारी खरीद नीतियों के अनुकूलन पर बल दिया गया है। साथ ही, प्रतिभाओं के विकास, भर्ती और उपयोग की व्यवस्था में सुधार कर नवाचार और उद्यमिता के लिए उनकी क्षमता और उत्साह को पूरी तरह प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।

इसके अलावा, लेख में शासन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि भविष्य के उद्योगों का विकास अनेक क्षेत्रों और पहलुओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए समन्वित शासन को मजबूत करना, विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना तथा वैज्ञानिक और प्रभावी नियामक व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। साथ ही, प्रौद्योगिकी निगरानी, जोखिम चेतावनी और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को भी सुदृढ़ किया जाना चाहिए।

लेख में यह भी कहा गया है कि भविष्य के उद्योगों में तकनीकी परिवर्तन की गति बहुत तेज होगी, निर्णय लेने के जोखिम अधिक होंगे और अनेक जटिल कारक प्रभाव डालेंगे। इससे नेतृत्व और शासन क्षमता की परीक्षा होगी। इसलिए सभी स्तरों के अधिकारियों से अत्याधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी ज्ञान का गंभीरता से अध्ययन करने, अपनी पेशेवर क्षमता बढ़ाने तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग की बेहतर समझ विकसित कर विवेकपूर्ण निर्णय लेने का आह्वान किया गया है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)