Monday, June 1, 2026
SGSU Advertisement
Home अंतर्राष्ट्रीय आईएईए विशेषज्ञों ने जापोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट में यूक्रेनी ड्रोन के प्रभाव वाली...

आईएईए विशेषज्ञों ने जापोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट में यूक्रेनी ड्रोन के प्रभाव वाली जगह का किया निरीक्षण

0
12

मॉस्को, 31 मई (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के विशेषज्ञों ने ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु ऊर्जा संयंत्र में उस स्थान का निरीक्षण किया है, जहां एक यूक्रेनी ड्रोन के हमले का प्रभाव देखा गया था। यह जानकारी स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से रविवार को दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, आईएईए की टीम ने घटनास्थल पर जाकर स्थिति का आकलन किया और सुरक्षा संबंधी पहलुओं की जांच की। यह निरीक्षण परमाणु संयंत्र की सुरक्षा और किसी भी संभावित खतरे के आकलन के लिए किया गया।

रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी तास की रिपोर्ट के मुताबिक, वियना में अंतरराष्ट्रीय संगठन में रूस के रूस के स्थायी प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने फेसबुक पर लिखा, “आईएईए के विशेषज्ञ 30 मई को जापोरिज्ज्या एनपीपी की यूनिट 6 पर यूक्रेनी ड्रोन हमले से हुए नुकसान का निरीक्षण किया। “

टीम ने बिल्डिंग में कई लेवल ऊपर बने मेटल एक्सेस हैच को क्षतिग्रस्त देखा, साथ ही जमीन पर मलबे के कुछ टुकड़े और जले हुए ऑप्टिकल फाइबर के बचे हुए हिस्से भी देखे।

एजेंसी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान टीम को पास में ड्रोन की आवाज और उन्हें रोकने के लिए हुई गोलीबारी सुनाई दी, जिसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थान पर शरण लेनी पड़ी। इसके बावजूद टीम ने अपने उपकरणों की मदद से पुष्टि की कि साइट पर विकिरण स्तर सामान्य बना हुआ है।

आईएईए ने यह भी कहा है कि उसे इमारत के अंदर तक पहुंच की आवश्यकता है, क्योंकि यह यूनिट-6 रिएक्टर के पास स्थित है, ताकि और विस्तृत जांच की जा सके।

आईएईए के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने इस हमले को गंभीर घटना बताते हुए कहा कि इससे परमाणु सुरक्षा के मूल सिद्धांतों को खतरा पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि परमाणु स्थलों पर हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें रोकना जरूरी है, ताकि परमाणु दुर्घटना के वास्तविक जोखिम से बचा जा सके।

वहीं रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी रोसाटॉम के प्रमुख एलेक्सी लिखाचेव ने दावा किया कि यह हमला एक यूक्रेनी लड़ाकू ड्रोन द्वारा किया गया था, जो फाइबर ऑप्टिक नियंत्रण से संचालित था। उन्होंने कहा कि विस्फोट से टरबाइन भवन में छेद हुआ, लेकिन मुख्य उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचा।

लिखाचेव के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के इतिहास में पहली बार है जब किसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र के मुख्य उपकरण पर सीधे हमला किया गया है।