Monday, June 1, 2026
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भारत का वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहा

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नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। भारत का वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत रहा है। यह केंद्र द्वारा तय अवधि के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप है। यह जानकारी कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (सीजीए) की ओर से सोमवार को दी गई।

राजकोषीय घाटा, सरकार के किसी वर्ष के कुल खर्च और कुल आय में अंतर को कहा जाता है। यह वित्त वर्ष 26 में 15.19 लाख करोड़ रुपए रहा है।

वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय घाटे का बजट में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप आना दिखाता है कि सरकार राजकोषीय समेकन के पथ पर बनी हुई है।

राजस्व घाटा (जो सरकार के राजस्व व्यय और राजस्व प्राप्तियों के बीच के अंतर को दर्शाता है) वित्त वर्ष 2026 में घटकर जीडीपी का 1.55 प्रतिशत रह गया। वित्त वर्ष 2025 में यह घाटा जीडीपी का 1.7 प्रतिशत था।

राजस्व घाटे में कमी को आम तौर पर सार्वजनिक वित्त की गुणवत्ता में सुधार के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह दर्शाता है कि सरकारी खर्च का एक बड़ा हिस्सा दैनिक व्यय के बजाय पूंजी सृजन की ओर निर्देशित किया जा रहा है।

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार वित्त वर्ष 26 में अपने पूंजीगत खर्च के लक्ष्य को पाने में सफल रही है। बीते वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत खर्च का अंतिम आंकड़ा 10.69 लाख करोड़ रुपए या संशोधित निर्धारित लक्ष्य 10.96 लाख करोड़ रुपए का 97.6 प्रतिशत रहा है।

चालू वित्त वर्ष के लिए, केंद्र ने पूंजीगत व्यय का लक्ष्य 12.2 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किया है, जो वित्त वर्ष 2026 के वास्तविक आंकड़ों से 14.1 प्रतिशत अधिक है।

इसके अलावा, केंद्र ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने शुद्ध कर राजस्व लक्ष्य को पूरा किया, जिसमें कुल संग्रह 26.2 लाख करोड़ रुपए रहा, जो संशोधित अनुमानों का 98 प्रतिशत है।

सकल कर राजस्व वित्त वर्ष 2026 में 40.2 लाख करोड़ रुपए रहा, जो संशोधित अनुमानों में निर्धारित 40.8 लाख करोड़ रुपए से कम है।

केंद्र ने वित्त वर्ष 2026 में राज्यों को 13.9 लाख करोड़ रुपए जारी किए।

वहीं, सरकार ने वित्त वर्ष 27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3 प्रतिशत रखा है, जो दिखाता है कि सरकार इस साल भी राजकोषीय समेकन के लिए प्रतिबद्ध है।