नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। भारत ने रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी स्वदेशी सैन्य क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने वायु से सतह पर मार करने वाली अत्याधुनिक रुद्रम-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया।
यह परीक्षण हवाई प्लेटफॉर्म से किया गया, जिसने मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता और उन्नत तकनीकी क्षमताओं को सफलतापूर्वक साबित कर दिया।
डीआरडीओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि रुद्रम-II मिसाइल का परीक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और महत्वपूर्ण प्रक्षेप पथ के तहत किया गया। इन परीक्षणों के दौरान मिसाइल की सभी प्रमुख उपप्रणालियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और निर्धारित मानकों पर पूरी तरह खरी उतरीं।
परीक्षण के दौरान दागी गई सभी मिसाइलों ने अपने पूर्वनिर्धारित लक्ष्यों को अत्यंत सटीकता के साथ भेदा। ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) में तैनात अत्याधुनिक ट्रैकिंग और रेंज उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरी तरह सफल रहे।
रुद्रम-II मिसाइल को डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र (आरसीआई) ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। इसके विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल), शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एआरडीई) और एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) सहित कई प्रमुख प्रयोगशालाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
इसके अलावा विकास सह उत्पादन साझेदारों (डीसीपीपी), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), क्षेत्रीय सैन्य विमानन योग्यता केंद्र, मिसाइल प्रणाली गुणवत्ता आश्वासन एजेंसी और रक्षा उद्योग से जुड़े कई अन्य संगठनों ने भी इस परियोजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और सभी औद्योगिक सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि रुद्रम-II का सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता, विश्वसनीयता और क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को और मजबूत करेगी तथा देश की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मददगार साबित होगी।
डीआरडीओ के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव ने भी इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और परीक्षण से जुड़ी सभी तकनीकी एवं परिचालन टीमों को बधाई देते हुए इसे भारतीय रक्षा अनुसंधान के लिए एक ऐतिहासिक सफलता बताया।

