शिमला, 3 जून (आईएएनएस)। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने राज्य सरकार पर ‘खालसा टैक्स’ को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब-हिमाचल बॉर्डर पर किसी भी तरह का अवैध टैक्स वसूला जा रहा है तो सरकार को तुरंत इसका संज्ञान लेना चाहिए और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने निजी गाड़ियों और पर्यटकों की गाड़ियों को एंट्री टैक्स से बाहर रखने की मांग की।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी जानकारी में इस तरह के किसी खालसा टैक्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन बॉर्डर क्षेत्र में लगातार विरोध और धरना-प्रदर्शन जरूर हो रहे हैं। उनके मुताबिक, जब से एंट्री टैक्स में बढ़ोतरी की गई है, तब से स्थानीय लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं। हाल ही में भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन देखने को मिला है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और सबसे पहले जो एंट्री टैक्स में बढ़ोतरी की गई है, उसे तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जनता और पर्यटन दोनों के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि निजी वाहनों और पर्यटक वाहनों को एंट्री टैक्स से बाहर रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि अगर ऐसा किया जाता है तो हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे न सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और राज्य की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि एंट्री टैक्स की वजह से आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है, खासकर बॉर्डर इलाकों में रहने वाले लोगों को। कई बार उन्हें बार-बार सीमा पार करनी पड़ती है, जिससे अतिरिक्त खर्च और समय दोनों बढ़ जाते हैं। पंजाब में रजिस्टर्ड गाड़ियों को भी कई बार टैक्स देना पड़ता है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि अगर कोई रिश्तेदार या सामान्य यात्री पंजाब से हिमाचल आता है तो उसे भी एंट्री टैक्स की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार आम लोगों और पर्यटकों के हित में निर्णय ले और निजी वाहनों को टैक्स से राहत दे।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर जो आंदोलन चल रहा है, उसे देखते हुए हिमाचल और पंजाब सरकार को आपसी बातचीत करनी चाहिए ताकि स्थिति शांत रहे और किसी भी तरह की हिंसा या तनाव की स्थिति न बने।
विधायक ने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा और कहा कि विधानसभा में सरकार ने यह आश्वासन दिया था कि छोटी गाड़ियों पर एंट्री टैक्स पहले की तरह 70 रुपए ही रहेगा, लेकिन बाद में जारी अधिसूचना में इसे बढ़ाकर 100 रुपए कर दिया गया। उनके अनुसार, अगर सरकार अपने ही वादे पर कायम रहती तो शायद आज यह आंदोलन देखने को नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते विरोध के बीच अब मांग यह भी उठ रही है कि एंट्री टैक्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए। हालांकि, उनका व्यक्तिगत मानना है कि कम से कम निजी और पर्यटक वाहनों को इससे बाहर रखा जाना चाहिए।
रणधीर शर्मा ने पर्यटन पर पड़ने वाले असर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बॉर्डर इलाकों में टोल बैरियर और एंट्री टैक्स दोनों की वजह से अक्सर लंबा जाम लग जाता है। कई बार पर्यटकों को एक-एक घंटे नहीं, बल्कि दो-दो घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जो पर्यटक गर्मी से बचने के लिए मनाली जैसे पर्यटन स्थलों की ठंडी वादियों का आनंद लेने आते हैं, उन्हें रास्ते में ही परेशान होना पड़ता है। बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। इस वजह से कई पर्यटक दोबारा आने से कतराने लगते हैं, जो राज्य के पर्यटन उद्योग के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

