बेंगलुरु, 4 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके. शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि सरकार गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों के बारे में विस्तृत जानकारी इकट्ठा कर रही है। यह कदम उन शिकायतों और याचिकाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें इन योजनाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है, विशेष रूप से ‘गृह ज्योति’ मुफ्त बिजली योजना और ‘गृह लक्ष्मी’ योजना के तहत, जिसके अंतर्गत घर की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है।
वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद विधान सौध में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार गारंटी योजनाओं की समीक्षा नहीं कर रही है, बल्कि उनके सही तरीके से लागू होने की जांच कर रही है।
उन्होंने कहा, “हम गारंटी योजनाओं की समीक्षा नहीं कर रहे हैं। असल में कुछ लोग ‘गृह ज्योति’ मुफ्त बिजली योजना का दुरुपयोग कर रहे हैं। हमें इस बारे में शिकायतें मिली हैं। कुछ लोगों ने घर के इस्तेमाल के लिए बिजली कनेक्शन लिया है, लेकिन वे उसका उपयोग व्यावसायिक कामों के लिए कर रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत लगभग 1.60 करोड़ लाभार्थी 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ उठा रहे हैं। जो लोग इसका इस्तेमाल रहने के लिए कर रहे हैं, वे बिना किसी परेशानी के इसका लाभ लेते रह सकते हैं।
सीएम ने कहा कि योजना का सही तरीके से लागू होना सुनिश्चित करने के लिए सरकार को लाभार्थियों का सही डेटा चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों की ओर इशारा किया, जहां एक ही नाम पर कई बिजली मीटर दर्ज पाए गए। उन्होंने किराये की संपत्तियों और योजना के दुरुपयोग को लेकर चिंता भी जताई।
उन्होंने कहा, “हमें लाभार्थियों की पूरी जानकारी चाहिए। एक ही व्यक्ति के नाम पर पांच से छह बिजली मीटर हैं। किराएदार कौन हैं? क्या वे राज्य के ही रहने वाले हैं या बाहर के? क्या वे इस सुविधा का सही इस्तेमाल कर रहे हैं? हमें ये सारी जानकारी चाहिए, जिसमें उनके फोन नंबर और बिजली के इस्तेमाल का तरीका भी शामिल है।”
‘गृह लक्ष्मी’ योजना का जिक्र करते हुए, जिसके तहत महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि कुछ मामलों में लाभार्थियों की मृत्यु हो जाने के बाद भी उनके नाम पर तय राशि निकाल ली गई थी।
उन्होंने कहा, “उचित जांच-पड़ताल होनी चाहिए। यदि किसी का निधन हो जाता है, तो पंचायत विकास अधिकारी या राजस्व निरीक्षक को इसकी जानकारी देनी चाहिए। परिवारों की भी जिम्मेदारी होनी चाहिए। पैसे की निकासी का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।”
बुनियादी ढांचे के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार ने बेंगलुरु में सड़कों के विकास के लिए आपातकालीन कोष के रूप में 2,000 करोड़ रुपए जारी करने का फैसला किया है और शहर के प्रभारी मंत्री इसके कामकाज की देखरेख करेंगे।
बैठक की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि विभागों को चल रहे कार्यक्रमों और उनके कार्यान्वयन में आ रही चुनौतियों पर रिपोर्ट जमा करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। हमने अभी-अभी यह प्रक्रिया शुरू की है। मैंने उनसे 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है कि क्या किया जा सकता है और क्या नहीं, जिसमें घोषणापत्र और बजट से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का कार्यान्वयन भी शामिल है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है, क्योंकि कैबिनेट विभागों का बंटवारा अभी पूरा नहीं हुआ है।

