Friday, June 5, 2026
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विजू शाह : क्लास बंक कर स्टूडियो पहुंचा लड़का, बॉलीवुड का बना ‘सिंथेसाइजर किंग’

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नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। एक स्कूल जाने वाला बच्चा चुपके से क्लास बंक करके सीधे बॉम्बे के एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में पहुंचा। वहां इलेक्ट्रॉनिक कीबोर्ड (सिंथेसाइजर) पर ऐसी धुन पैदा की जो आगे फिल्म ‘डॉन’ (1978) का सबसे बड़ी सिग्नेचर ट्यून बनी। ‘ये मेरा दिल यार का दीवाना’ गाने में बैकग्राउंड में बजने वाले उस सिंथ के पीछे कोई और नहीं, बल्कि विजय कल्याणजी शाह थे, जिन्हें आज दुनिया ‘विजू शाह’ के नाम से जानती है।

विजू शाह का जन्म 5 जून 1959 को बॉम्बे में हुआ था। इसी वर्ष उनके पिता कल्याणजी वीरजी शाह को फिल्म ‘नागिन’ (1954) में ‘बीन’ की धुन के लिए बजाए गए क्लेवियोलिन (एक प्रारंभिक इलेक्ट्रॉनिक कीबोर्ड) के लिए देशव्यापी पहचान मिली थी। इसी दौर में उनके पिता ने “कल्याणजी वीरजी एंड पार्टी” ऑर्केस्ट्रा की नींव रखी और इसी वर्ष 1956 में महान गीतकार आनंद बख्शी ने भी अपने करियर की शुरुआत की, जो आगे चलकर विजू शाह के सबसे करीबी सहयोगी बने।

विजू शाह का परिवार मूल रूप से गुजरात के कच्छ का रहने वाला था, जो मुंबई आकर गिरगांव में बस गया। वहां उनका एक किराना स्टोर था। एक दिलचस्प किस्सा यह है कि उनके पिता कल्याणजी वीरजी शाह और चाचा आनंदजी वीरजी शाह ने संगीत की अपनी शुरुआती शिक्षा एक ऐसे शिक्षक से ली थी, जो दुकान से उधार राशन लेने के बदले में उन्हें संगीत सिखाता था।

मराठी और गुजराती संस्कृति के बीच पले-बढ़े विजू शाह ने महज 4-5 साल की उम्र में हारमोनियम सीख ली थी। लेकिन उनकी असली दीवानगी तब जगी जब 1970 के दशक में सिंथेसाइजर की एंट्री भारत में हुई।

फिरोज खान की फिल्मों ‘कुर्बानी’ (1980) और ‘जांबाज’ (1986) के इलेक्ट्रॉनिक संगीत को निखारने के बाद उन्होंने 1988 में अपना साहसिक सोलो एल्बम ‘वाय नॉट सिंथेसाइजर’ रिलीज किया।

विजू शाह और निर्देशक राजीव राय की जोड़ी ने 1990 के दशक में हिंदी सिनेमा को एक नया साउंड दिया। ‘त्रिदेव’ (1989) का ब्लॉकबस्टर गाना ‘ओये ओये’ लोकप्रिय हुआ। इसके बाद ‘विश्वात्मा’ (1992) का ‘सात समुंदर पार’ आया था।

‘मोहरा’ (1994) के गाने ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ और ‘टिप टिप बरसा पानी’ ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और इस एल्बम की 8 मिलियन से अधिक प्रतियां बिकीं। ‘गुप्त’ (1997) में उन्होंने पहली बार भारतीय सिनेमा में डार्क ट्रान्स और गैराज संगीत का परिचय कराया, जिसने उन्हें 1998 में सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड स्कोर का फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया।

मुख्यधारा से कुछ समय दूर रहने के बाद, वर्ष 2020 में नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘क्लास ऑफ 83’ के साथ विजू शाह ने प्रामाणिक 1980 के दशक के सिंथ स्कोर के साथ वापसी की। इसके बाद, लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद राजीव राय और विजू शाह की ऐतिहासिक जोड़ी ने वर्ष 2025 में ‘जोरा’ नामक कम बजट की सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म के साथ धमाकेदार वापसी की, जिसे सीधे यूट्यूब पर रिलीज किया गया।