शिमला, 5 जून (आईएएनएस)। विश्व पर्यावरण दिवस पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को याद दिलाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को प्रकृति ने अनमोल उपहारों से नवाजा है। यहां के घने वन, स्वच्छ नदियां, हिमाच्छादित पर्वत और समृद्ध जैव विविधता प्रदेश की पहचान हैं। इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पर्यावरण संरक्षण के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। सुक्खू ने कहा कि एक पौधा लगाना केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखना है। सीएम सुक्खू ने लोगों से प्रकृति के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता विकसित करने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के लोगों के सहयोग से हिमाचल प्रदेश पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श राज्य बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा, “हिमाचल की पहचान विशाल पर्वतों, निर्मल जलधाराओं और शुद्ध वायु में बसती है। प्रकृति ने हमें यह अनुपम धरोहर सौंपी है। इसे सहेजना हमारा केवल दायित्व ही नहीं, यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा संकल्प भी है। आइए, मिलकर इस विरासत की पवित्रता और समृद्धि को अक्षुण्ण बनाए रखें।”
वहीं, रिज मैदान में आयोजित मिनी मैराथन में हिस्सा लेने पहुंचे हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने मीडिया से बातचीत के दौरान लाउडस्पीकर और शोर-शराबे के संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा कि किसी भी अभियान को सफल बनाने के लिए समाज का सहयोग आवश्यक है। जब तक समाज स्वयं आगे बढ़कर भागीदारी नहीं निभाएगा, तब तक ऐसे प्रयासों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकती।
विभिन्न विभागों और अधिकारियों ने जिस प्रकार समाज को इस अभियान से जोड़ा है, उसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। राज्यपाल ने कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही ऐसे जन-जागरूकता अभियानों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर फैले कूड़े-कचरे और प्लास्टिक प्रदूषण के मुद्दे पर राज्यपाल ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने लोगों से अपने घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने की अपील करते हुए कहा कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। उन्होंने आयोजकों से भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया।
जनगणना के विषय में राज्यपाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने 1 जून से 15 जून तक स्व-गणना की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने नागरिकों से स्वयं अपना सत्यापन कर पंजीकरण करवाने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि भविष्य में देश की विकास योजनाओं और प्रगति को आगे बढ़ाने में जनगणना के आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, इसलिए सभी लोगों को इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।

