चेन्नई, 5 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु के पूर्व भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को औपचारिक तौर पर पार्टी को अलविदा कह दिया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में बड़ा और निर्णायक बदलाव लाना है। इसी के साथ उन्होंने अपने एक्स प्रोफाइल को बदलकर खुद को “अच्छी राजनीति की तलाश में एक आम आदमी” बताया है।
पूर्व पुलिस अधिकारी से नेता बने के. अन्नामलाई ने साफ किया है कि वह पारंपरिक राजनीतिक तरीकों से अलग जनता के समर्थन पर आधारित एक आंदोलन को आगे बढ़ाने पर ध्यान देंगे। उनका कहना है कि यह पहल राज्य की जाति-आधारित राजनीति को बदलने और पिछले कई दशकों से तमिलनाडु की राजनीति पर प्रभाव रखने वाली द्रविड़ विचारधारा को चुनौती देने का प्रयास होगी।
अपने पुलिस करियर के दौरान अन्नामलाई को उनके सख्त और अलग कार्यशैली के कारण ‘सिंघम’ कहा जाने लगा था। अब उन्हें उम्मीद है कि वह राजनीति में भी उसी तरह अपनी छाप छोड़ेंगे और सफलता हासिल करेंगे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अपने छह साल के कार्यकाल के दौरान अन्नामलाई की यह सोच कई बार दिखाई दी। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा का जनाधार बढ़ाने के लिए जोरदार अभियान चलाए। यह ऐसा राज्य है, जहां पिछले करीब पांच दशकों से द्रविड़ दलों का राजनीतिक दबदबा रहा है।
भाजपा नेतृत्व को लिखे अपने इस्तीफे में अन्नामलाई ने राजनीति में आम लोगों और प्रभावशाली वर्ग के बीच मौजूद दूरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह इस सोच और व्यवस्था को बदलना चाहते हैं, ताकि आम लोगों की भागीदारी राजनीति में बढ़ सके।
अन्नामलाई ने लिखा, “मैं इस सोच को बदलना चाहता था कि राजनीति केवल अमीर और चुनिंदा लोगों के लिए है, आम लोगों के लिए नहीं। मैं भाजपा नेतृत्व का दिल से आभारी हूं कि उन्होंने मुझ जैसे युवा और अपेक्षाकृत कम अनुभवी व्यक्ति पर भरोसा जताया और मुझे बड़ी जिम्मेदारियां तथा नेतृत्व का अवसर दिया।”
उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के लोग कई दशकों से एक जैसी राजनीतिक बहसों और मुद्दों को सुनते आ रहे हैं। अब वे बदलाव चाहते हैं और नई तरह की राजनीति की उम्मीद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में कुछ सकारात्मक बदलाव जरूर देखने को मिले, लेकिन वे लंबे समय तक कायम नहीं रह सके।”
भाजपा से औपचारिक रूप से अलग होने के बाद अन्नामलाई अब जनता के समर्थन के आधार पर अपना अभियान आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनके इस प्रयास से राज्य की पारंपरिक राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा।
अन्नामलाई की “आम आदमी” वाली छवि और संदेश का लोगों पर असर पड़ सकता है। देश के कुछ अन्य राज्यों में भी इस तरह के प्रयोग पहले किए जा चुके हैं। हालांकि, किसी मजबूत संगठन और पार्टी ढांचे के बिना यह पहल कितनी सफल होगी, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा।

