धर्मशाला, 5 जून (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शुक्रवार को चुनाव अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने मतदाता सूची को अपडेट रखने और उसकी शुद्धता बनाए रखने में बीएलओ की भूमिका की सराहना की।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और इसे सटीक बनाए रखने में बीएलओ का योगदान बेहद अहम है। उन्होंने अधिकारियों से चुनावी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
मुख्य चुनाव आयुक्त का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब प्रदेश में नवंबर 2027 में संभावित विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू हो चुकी हैं। राज्य की सभी 68 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं और चुनाव आयोग अभी से मतदाता सूची को दुरुस्त करने पर फोकस कर रहा है।
इस बीच, चुनाव आयोग ने बताया कि ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में एसआईआर के तीसरे चरण की गणना प्रक्रिया जारी है। आयोग के अनुसार इन राज्यों में यह प्रक्रिया 3 मई 2026 से शुरू हुई है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन पात्र मतदाताओं के गणना प्रपत्र 28 जून 2026 तक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पास पहुंच जाएंगे, उनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।
आयोग ने यह भी बताया कि जो लोग 28 जून तक फॉर्म जमा नहीं कर पाएंगे, वे दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान निर्धारित घोषणा पत्र के साथ फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं।
एसआईआर के तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध करा रहे हैं। मतदाता इन फॉर्मों को बीएलओ के माध्यम से या ऑनलाइन भी जमा कर सकते हैं। अधिकतम कवरेज सुनिश्चित करने के लिए बीएलओ प्रत्येक घर में जाकर फॉर्म वितरित, एकत्र और सत्यापित कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, बीएलओ अपने साथ कम से कम 30 खाली फॉर्म-6 और घोषणा पत्र भी रखते हैं, ताकि नए मतदाता बनने के इच्छुक लोगों को तुरंत आवेदन की सुविधा मिल सके।
राजनीतिक दलों की भागीदारी बढ़ाने के लिए आयोग ने मान्यता प्राप्त दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) को प्रतिदिन 50 तक फॉर्म एकत्र कर बीएलओ को सौंपने की अनुमति दी है। आयोग ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से अधिक बीएलए नियुक्त करने का भी आग्रह किया है।
चुनाव आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत 14 मई को 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का आदेश दिया गया था।

