बेंगलुरु, 5 जून (आईएएनएस)। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर चार पावर सेंटर हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को चुनौती दी कि अगर पार्टी बिना किसी अंदरूनी कलह के सरकार नहीं चला सकती, तो विधानसभा भंग कर दे और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) और स्थानीय निकाय के साथ ही विधानसभा चुनाव भी कराए।
शुक्रवार को बेंगलुरु में भाजपा प्रदेश कार्यालय जगन्नाथ भवन में मीडिया से बात करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि पिछले दो सालों से मुख्यमंत्री पद के लिए सत्ता का संघर्ष चल रहा है। शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के 48 घंटे के भीतर ही मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया, जिससे पता चलता है कि राज्य सरकार अंदरूनी कलह से उबर नहीं पाई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राज्य में कोई भी सार्थक विकास कार्य करने में विफल रही है और लोग अब इसके कामकाज से निराश हैं। किसान विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं और मुख्यमंत्री शिवकुमार सरकार के भीतर अलग-अलग हितों के बीच संतुलन बनाने में विफल रहे हैं।
विजयेंद्र ने दावा किया कि कांग्रेस राज्य में ‘चार पावर सेंटरों’ डीके शिवकुमार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद, कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कारण संघर्ष कर रही है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने सरकार पर किसानों, गरीबों और आम जनता के लिए काम करने में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि पिछले तीन वर्षों में सरकार कुशासन और वित्तीय कुप्रबंधन में शामिल रही है।
विजयेंद्र ने कहा कि कैबिनेट के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने हाल के इस्तीफों और विभागों के बंटवारे को लेकर के.एच. मुनियप्पा और के.जे. जॉर्ज जैसे मंत्रियों के असंतोष का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के संघर्ष के कारण विकास कार्य पीछे छूट गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने खुद माना है कि पार्टी में वरिष्ठता और ईमानदारी की कोई कद्र नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो पार्टी अगले चुनाव में सत्ता में नहीं लौट पाएगी।
एक सवाल के जवाब में विजयेंद्र ने कहा कि बीजेपी की चुनावी संभावनाएं पूरी तरह से कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर निर्भर नहीं हैं। बीजेपी के पास अपनी संगठनात्मक ताकत, समर्पित कार्यकर्ता और अगले चुनावों के लिए एक स्पष्ट रणनीति है।

