Monday, June 8, 2026
SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय खाद-बीज और डीजल की मार से किसान बेहाल, आय दोगुनी नहीं आधी...

खाद-बीज और डीजल की मार से किसान बेहाल, आय दोगुनी नहीं आधी रह गई: अखिलेश यादव

0
6

लखनऊ, 8 जून (आईएएनएस)। मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किसानों की स्थिति को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। डीजल, खाद और बीज की बढ़ती कीमतों ने खेती को संकट में डाल दिया है और किसान आर्थिक दबाव झेलने को मजबूर हैं।

अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा कि सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन 12 वर्षों के शासन के बाद किसानों की आय बढ़ने के बजाय और कमजोर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई की मार ने किसानों और आम जनता दोनों का जीवन कठिन बना दिया है।

सपा प्रमुख ने कहा कि डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि के बाद अब उर्वरकों के दाम बढ़ने से किसानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। खेती के लिए आवश्यक खाद, बीज और सिंचाई पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे कृषि कार्य घाटे का सौदा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही बिजली, सिंचाई और उत्पादन लागत की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में उर्वरकों की बढ़ी कीमतें उनके लिए नई मुसीबत लेकर आई हैं।

उन्होंने कहा कि फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश युक्त एनपीके उर्वरकों का व्यापक उपयोग होता है। इनकी कीमतों में वृद्धि से किसानों का मौसमी बजट प्रभावित हो रहा है और खेती की लागत में और इजाफा हो रहा है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार को किसानों और आम जनता की परेशानियों की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों का बोझ सीधे किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जबकि महंगाई लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि कृषि क्षेत्र में बढ़ते संकट के कारण किसानों का खेती से मोहभंग हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रही हैं, जिनसे किसान धीरे-धीरे खेती और अपनी जमीन से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि खेती की लागत को नियंत्रित करने और किसानों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।