Thursday, June 11, 2026
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वाराणसी की अदालत भगवान राम पर टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ नई याचिका पर सुनवाई करेगी

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नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। वाराणसी की एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने बुधवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग वाली एक नई शिकायत को मंजूरी दे दी। यह शिकायत अमेरिका में एक बातचीत के दौरान भगवान राम को काल्पनिक पात्र बताने वाली उनकी कथित टिप्पणी को लेकर की गई थी।

एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (एमपी/एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने वकील हरिशंकर पांडे की क्रिमिनल रिविजन याचिका को मंजूरी दी और एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिकायत को शुरुआती स्तर पर ही सुनवाई के लायक न मानते हुए खारिज कर दिया गया था।

रिविजन कोर्ट ने माना कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता को सुनवाई का मौका दिए बिना ही जल्दबाजी में शिकायत खारिज कर दी थी और मामले को कानून के अनुसार नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया। कोर्ट के आदेश में स्पेशल जज ने कहा कि राहुल गांधी का कथित बयान अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में दिया गया था, न कि संसदीय कार्यवाही के दौरान।

उन्होंने कहा कि मामले पर मजिस्ट्रेट को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) के तहत उचित न्यायिक विचार करने की जरूरत है।

पांडे ने एसीजेएम के उस निष्कर्ष को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की मंजूरी जरूरी है। राहुल गांधी लोकसभा में रायबरेली का प्रतिनिधित्व करते हैं और विपक्ष के नेता हैं।

अपनी शिकायत में पांडे ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता गांधी की टिप्पणियां ‘भारतीय न्याय संहिता’ (बीएनएस) की धारा 196, 351 और 353 के तहत दंडनीय अपराध हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस बयान से सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और अशांति फैली।

शिकायतकर्ता का दावा था कि 21 अप्रैल 2025 को बोस्टन की ब्राउन यूनिवर्सिटी में बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने भगवान राम को पौराणिक और काल्पनिक पात्र बताया था।

रिविजन याचिका को मंजूरी देते हुए स्पेशल जज ने एसीजेएम के आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि कानून के अनुसार शिकायत पर नए सिरे से विचार किया जाए।

इससे पहले 27 मई को एसीजेएम ने शिकायत खारिज कर दी थी। उन्होंने कहा था कि मौजूदा सांसद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लोकसभा स्पीकर की मंजूरी न होने के कारण शिकायत सुनवाई के लायक नहीं है।