Thursday, June 11, 2026
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कोलकाता में पीएम मोदी के साथ 40 हजार लोग करेंगे योग, गिनीज रिकॉर्ड बनाने की तैयारी

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कोलकाता, 11 जून (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जून को कोलकाता में आयोजित होने वाले भव्य योग कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं और आयोजकों का दावा है कि इस आयोजन के दौरान कई गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनेंगे।

योग प्रशिक्षक एवं वीवाईएएसए कोलकाता के निदेशक डॉ. अभिजीत घोष ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में गुरुवार को बताया कि इस बार योग दिवस का फोकस पूरी तरह कोलकाता पर रहेगा। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि योग दिवस की थीम और उसका प्रस्तुतीकरण इतने बड़े स्तर पर इतने कम समय में किया जा सकता है। राज्य सरकार के विभिन्न विभाग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।

डॉ. घोष ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जून को आयोजित मुख्य कार्यक्रम में लगभग 30 से 40 हजार लोग एक साथ योगाभ्यास करेंगे। कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर अभी रेड रोड और ब्रिगेड मैदान के बीच अंतिम निर्णय होना बाकी है। बारिश के कारण ब्रिगेड मैदान में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं, इसलिए रेड रोड पर आयोजन होने की संभावना भी जताई जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे बंगाल में योग का वातावरण बनाया जाएगा। गंगा नदी पर नावों में योगाभ्यास का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि अभी तक 450 नावों पर योग का गिनीज रिकॉर्ड है, जबकि बंगाल में 500 नावों को एक साथ जोड़कर नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी चल रही है। गंगा तट, सुंदरबन, गांवों और शहर की गलियों तक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि इसका संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

योग के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए डॉ. अभिजीत घोष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बेहद व्यस्त दिनचर्या के बावजूद प्रतिदिन योग के लिए समय निकालते हैं। प्रधानमंत्री मोदी आम लोगों के साथ योग करना पसंद करते हैं। उनके लिए कोई विशेष मंच या अलग व्यवस्था नहीं होती। अभ्यास शुरू होने के बाद वे जमीन पर बैठकर अन्य प्रतिभागियों के साथ योग करते हैं। योग को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका ऐतिहासिक रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित कई नेताओं ने योग किया, लेकिन योग को विश्व स्तर पर पहुंचाने के लिए जिस नेतृत्व की आवश्यकता थी, वह मोदी ने प्रदान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं योग को अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी का योग से जुड़ाव वर्ष 2002 के आसपास गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू हुआ था। उस दौरान वीवाईएएसए संस्था की ओर से गुजरात में नौकरशाहों और अधिकारियों के लिए योग प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के योग गुरु डॉ. एचएन नागेंद्र उनके भी गुरु हैं और आज भी संस्था के प्रशिक्षक समय-समय पर दिल्ली जाकर योग प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रमों में सहयोग करते हैं।

आयोजन की तैयारियों पर डॉ. अभिजीत घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल का स्वास्थ्य विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय, पुलिस प्रशासन, कोलकाता नगर निगम और लोक निर्माण विभाग सहित विभिन्न एजेंसियां मिलकर कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप देने में लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनरी जिस तरह से जुटी हुई है, वह अभूतपूर्व है। योग को धर्म से जोड़ने की बहस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि योग किसी एक धर्म विशेष की परंपरा नहीं है, बल्कि यह एक सार्वभौमिक अभ्यास है। उन्होंने कहा कि यदि योग का प्रचार-प्रसार गांव-गांव तक पहुंचाना है, तो इसके सार्वजनिक प्रदर्शन और बड़े आयोजनों की आवश्यकता है। योग हर व्यक्ति के लिए है और इसका उद्देश्य शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।

उन्होंने आगे बताया कि कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए लगभग 600 योग शिक्षकों और डेमोंस्ट्रेटरों का चयन किया गया है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के परिसर में हाल ही में इनके चयन की प्रक्रिया पूरी हुई। अब इन प्रशिक्षकों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन अभ्यास सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि 21 जून को सभी प्रतिभागी एक समान योग प्रोटोकॉल का पालन कर सकें।