नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने इजरायल की ओर से अमेरिका के समर्थन से ईरान पर किए गए सैन्य हमले की पहली वर्षगांठ पर कहा है कि देश की मजबूती, प्रतिरोध और दृढ़ संकल्प ने हमलावरों के सभी मकसदों को नाकाम कर दिया और उनकी योजनाओं को हार में बदल दिया।
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, 13 जून को हुए इस हमले की पहली वर्षगांठ पर बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रसिद्ध फारसी कवि साएब तबरीजी की एक पंक्ति साझा की। उन्होंने कहा कि यह हमला ‘जीत के भ्रम’ में उस जमीन पर किया गया, जो ‘इतिहास में अपने मजबूत प्रतिरोध और दुश्मनों को हराने के संकल्प के लिए जानी जाती है।’
आईआरएनए के अनुसार, बाघेई ने कहा कि आज उस सैन्य आक्रमण की शुरुआत की पहली वर्षगांठ है, जिसे जायोनी शासन ने अमेरिका के सहयोग से अंजाम दिया था। लेकिन आखिरकार ईरानी जनता की अटूट इच्छाशक्ति, प्रतिरोध और बलिदान ने दुश्मन के उस सपने को शर्मनाक हार में बदल दिया, जो जीत के भ्रम में था।
बाघेई ने कहा कि इन घटनाओं ने ईरान की ताकत, धैर्य और सम्मान के साथ जीने की उसकी चाहत को दुनिया के सामने दिखाया। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र का दृढ़ संकल्प इतिहास में एक मिसाल बन गया है।
उन्होंने साएब तबरीजी की कुछ और पंक्तिया भी साझा कीं, जिनमें बलिदान, संघर्ष और कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहने की भावना की प्रशंसा की गई है।
आईआरएनए की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने 13 जून 2025 को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इस दौरान ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों और वैज्ञानिकों की हत्या की गई। इसके जवाब में ईरान ने भारी हवाई हमले किए। कुछ दिनों बाद अमेरिका भी इस युद्ध में शामिल हो गया। यह संघर्ष 12 दिनों तक चला और अंत में युद्धविराम के साथ समाप्त हुआ।
वहीं, दूसरी ओर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को कसम खाई कि जब तक वह इजरायल के पीएम हैं, तब तक वह ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे पर पूरी तरह सहमत हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जब तक मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। इस मुद्दे पर मेरे और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच पूरी सहमति है। 30 से ज्यादा सालों से, मैं ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान में सबसे आगे रहा हूं।”

