Tuesday, August 11, 2026
SGSU Advertisement
Home राजनीति सुकांत मजूमदार बोले- लगभग 5,000 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया

सुकांत मजूमदार बोले- लगभग 5,000 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया

0
27

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार में घुसपैठियों को चिन्हित कर बंगाल से बाहर किया जा रहा है। इस मामले में केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि लगभग 5,000 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया है।

मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले ही बता चुके हैं कि लगभग 5,000 लोगों को वापस भेजा गया है। हमारी सरकार ‘पहचान, नाम हटाना और वापस भेजना’ (डिटेक्शन, डिलीशन और डिपोर्टेशन) की नीति अपना रही है। यह प्रक्रिया जारी रहेगी और समय-समय पर मुख्यमंत्री आपको वापस भेजे गए लोगों की संख्या के बारे में भी जानकारी देते रहेंगे।

उन्होंने फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी जांच का जिक्र करते हुए कहा कि फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी जांच कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर से भी यह आरोप सामने आया है कि उनके हस्ताक्षर फर्जी थे। इस मामले की जांच चल रही है और दोनों पक्षों की जांच की जाएगी।

पूर्व मंत्री मानस रंजन भुनिया के टीएमसी छोड़ने पर सुकांत मजूमदार ने कहा कि वे पहले कांग्रेस में थे। बाद में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। एक समय ऐसा भी आया जब उन पर दबाव डाला गया और कथित गुंडागर्दी के कारण उन्हें खेतों से होकर भागना पड़ा। अब, पीएम मोदी के नारे ‘भरोसा इन, धरना आउट, भय आउट’ के तहत उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है और पार्टी से बाहर आ गए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय परीक्षाएं बहुत कम होती थीं, और जब भी होती थीं तो अक्सर गड़बड़ियों की खबरें आती थीं। इस बार मैं बस इतना कह सकता हूं कि मैंने मुख्यमंत्री से बात की है, और उस बातचीत के आधार पर मैं युवाओं को भरोसा दिलाता हूं कि वे बिना किसी डर के परीक्षा में शामिल हों। परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी।

टीएमसी सांसदों के बगावत पर उन्होंने कहा कि यह टीएमसी का अंदरूनी मामला है कि कितने सांसद किसके साथ हैं, वे कहां जाएंगे, और नेता के तौर पर किसका समर्थन करेंगे। यह उनकी पार्टी का अंदरूनी फैसला है।

दूसरी ओर, बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि ममता बनर्जी के धृतराष्ट्र जैसे स्नेह ने पार्टी को कमजोर और बांट दिया है।

उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास था कि टीएमसी खत्म होगी, लेकिन इतनी जल्दी होगी, इस बारे में विश्वास नहीं था। टीएमसी के टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं। विधानसभा के बाद संसद में भी बंट गए हैं। टीएमसी की कोई नीति या दर्शन नहीं है। अभिषेक बनर्जी पर जो ममता बनर्जी का स्नेह था, यही वजह टीएमसी के पतन का है।