श्रीनगर/जम्मू, 16 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले की पुलिस ने मंगलवार को बताया कि एक कुख्यात ड्रग्स तस्कर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, जबकि राजौरी जिले के अधिकारियों ने डॉक्टर की पर्ची के बिना प्रतिबंधित दवा बेचने के आरोप में दो मेडिकल दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं।
अनंतनाग पुलिस ने कहा, “ड्रग्स तस्करी और नशीले पदार्थों की समस्या के खिलाफ अपनी लगातार कार्रवाई जारी रखते हुए अनंतनाग पुलिस ने पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत एक कुख्यात ड्रग्स तस्कर के खिलाफ मामला दर्ज किया है।”
आरोपी निसार अहमद गगरू (स्वर्गीय अली मोहम्मद गगरू का बेटा, निवासी सोफ शाली, कोकरनाग) एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज कई मामलों में शामिल पाया गया था और लगातार अवैध ड्रग्स तस्करी की गतिविधियों में लिप्त था, जिससे समाज, खासकर युवाओं के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।
अनंतनाग पुलिस द्वारा तैयार किए गए डोजियर पर कार्रवाई करते हुए और सक्षम अधिकारी से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
वह अभी जम्मू की सेंट्रल जेल कोट भलवाल में है, जहां डिटेंशन वारंट तामील किया गया। नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों में उसकी संलिप्तता को प्रभावी ढंग से रोकने और उसे ड्रग्स तस्करी में शामिल रहने से रोकने के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) लागू किया गया है।
अनंतनाग पुलिस ड्रग्स के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति के प्रति प्रतिबद्ध है और ड्रग मुक्त समाज सुनिश्चित करने के लिए ड्रग्स तस्करों और नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रखेगी।
ड्रग्स नियमों के उल्लंघन के खिलाफ एक अन्य बड़ी कार्रवाई में राजौरी के डिप्टी कमिश्नर अभिषेक शर्मा ने राजौरी शहर में अचानक किए गए निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद दो मेडिकल स्टोर के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।
राजौरी के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनोहर लाल राणा और एसएचओ राजौरी की मौजूदगी में चलाए गए इस निरीक्षण अभियान का मकसद प्रतिबंधित दवाइयों के दुरुपयोग को रोकना और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना था।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने नियंत्रित दवाइयों की बिक्री और वितरण से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की और तय लाइसेंसिंग शर्तों के पालन की पुष्टि करने के लिए स्टॉक रजिस्टर देखे। अधिकारियों को होपवेल मेडिकोस (खेओरा, राजौरी) और स्टार मेडिकोस (गुज्जर मंडी) में गंभीर कमियां मिलीं। इनमें कम्प्यूटराइज्ड बिलिंग सिस्टम के जरिए जरूरी बिक्री रिकॉर्ड न रखना और नशे की लत लगाने वाली दवाइयों की बिक्री में कथित अनियमितताएं शामिल थीं।
इन उल्लंघनों को गंभीरता से लेते हुए लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट’ के संबंधित प्रावधानों के तहत अगले आदेश तक दोनों प्रतिष्ठानों के रिटेल दवा बिक्री लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।
डिप्टी कमिश्नर ने दोहराया कि रेगुलेटेड फार्मास्युटिकल उत्पादों की बिक्री और वितरण को कानूनी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि उनके गलत इस्तेमाल को रोका जा सके और लोगों की सेहत की सुरक्षा की जा सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई मेडिकल स्टोर लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करता है या प्रतिबंधित दवाइयों की गैर-कानूनी बिक्री में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी केमिस्टों और फार्मेसी संचालकों को निर्देश दिया कि वे सही रिकॉर्ड रखें, कम्प्यूटराइज्ड बिलिंग के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करें और बिना किसी अपवाद के लाइसेंसिंग की सभी जरूरतों का पालन करें।
डीसी ने आगे कहा कि जिला प्रशासन नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ अपनी लड़ाई और राजौरी को नशा मुक्त जिला बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कानून को सख्ती से लागू करने और जनहित की रक्षा के लिए पूरे जिले में मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण जारी रहेगा।

