Thursday, June 18, 2026
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शिवसेना यूबीटी और सपा में बड़ी टूट के संकेत, राहुल गांधी युवाओं को भड़का रहे: संजय निरुपम

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मुंबई, 18 जून (आईएएनएस)। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी, शिवसेना (यूबीटी) और समाजवादी पार्टी को लेकर तीखे बयान दिए। एक तरफ उन्होंने केंद्र की एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। वहीं, दूसरी तरफ विपक्षी दलों पर युवाओं को भड़काने, भ्रम फैलाने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट में चल रही कथित अंदरूनी कलह और समाजवादी पार्टी में संभावित टूट को लेकर भी बड़ा दावा किया।

संजय निरुपम ने कोटा में राहुल गांधी के छात्रों के साथ हालिया संवाद कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी तरह पूर्व-नियोजित और स्क्रिप्टेड कार्यक्रम था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी नीट और सीबीएसई जैसे मुद्दों के बहाने देश के युवाओं को सरकार के खिलाफ भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। निरुपम ने कहा कि राहुल गांधी का उद्देश्य युवाओं में असंतोष पैदा कर देश में अराजकता का माहौल बनाना है, लेकिन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि भारत का युवा राष्ट्रवादी सोच रखता है और देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अव्यवस्था फैलाने की राजनीति का हिस्सा नहीं बनेगा।

उन्होंने कहा कि भारत की तुलना नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसे देशों से नहीं की जा सकती, क्योंकि यहां लोकतांत्रिक मूल्य समाज की जड़ों तक जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, राहुल गांधी यदि अपनी राजनीतिक असफलताओं से ध्यान हटाने के लिए युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें एक और राजनीतिक असफलता का सामना करना पड़ेगा।

शिवसेना (यूबीटी) में चल रही कथित नाराजगी और सांसदों के असंतोष को लेकर भी संजय निरुपम ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से यह खबर सामने आ रही थी कि पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद अलग समूह बनाना चाहते हैं और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा गया है। इस खबर की पुष्टि उस समय हुई जब उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में कथित तौर पर छह सांसद शामिल नहीं हुए। उन्होंने इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बताया।

उद्धव ठाकरे गुट द्वारा बैठक के लिए व्हिप जारी किए जाने पर भी निरुपम ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संसदीय व्यवस्था में व्हिप का उपयोग संसद या विधानसभा के भीतर होने वाली विधायी गतिविधियों के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी विधेयक, प्रस्ताव या मतदान के दौरान सांसदों और विधायकों को निर्देश देने के लिए व्हिप जारी किया जाता है। लेकिन संसद या विधानसभा के बाहर होने वाली बैठकों के लिए व्हिप जारी करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। निरुपम ने दावा किया कि इस मामले में पार्टी नेतृत्व को गलत सलाह दी गई और इससे पार्टी की सार्वजनिक रूप से किरकिरी हुई है। उन्होंने कहा कि संसदीय नियमों की सही समझ के अभाव में यह फैसला लिया गया।

संजय निरुपम ने कहा कि वर्तमान समय में देशभर के राजनीतिक कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों के बीच एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कामकाज से प्रभावित होकर विभिन्न दलों के नेता और जनप्रतिनिधि एनडीए की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई क्षेत्रीय दलों के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा है कि भविष्य में वे एनडीए के साथ आ सकते हैं। निरुपम ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच यह भावना बन रही है कि विकास और स्थिरता के लिए एनडीए सबसे मजबूत विकल्प है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए संजय निरुपम ने कहा कि समाजवादी पार्टी में भी बड़े पैमाने पर असंतोष और बगावत की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हालिया दावों का हवाला देते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी के सांसद बड़ी संख्या में अलग समूह बनाकर एनडीए का समर्थन करें तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

निरुपम ने दावा किया कि देश में जो राजनीतिक माहौल बन रहा है, उसमें कई क्षेत्रीय दलों के सांसद अपने नेतृत्व से असंतुष्ट होकर नए राजनीतिक विकल्प तलाश सकते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दलों के शीर्ष नेता भले अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन उनके सांसदों और कार्यकर्ताओं के बीच अलग तरह की सोच विकसित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल लगातार कमजोर हो रहे हैं, जबकि एनडीए का प्रभाव और राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ रही है।

—आईएएनएस

पीएसके