बीजिंग, 18 जून (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का 62वां सत्र स्विट्जरलैंड के जेनेवा में आयोजित हो रहा है। चीनी प्रतिनिधिमंडल की उप प्रमुख ली श्याओमेई ने 16 जून को हुई बैठक में चीन का रुख स्पष्ट किया।
ली श्याओमेई ने कहा कि वैश्विक मानवाधिकार प्रशासन चुनौतियों का सामना कर रहा है। मानवाधिकार परिषद की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ पर, प्रत्येक देश द्वारा स्वतंत्र रूप से चुने गए मानवाधिकार विकास पथों के सम्मान की वकालत करना आवश्यक है, और मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय को इसमें रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। चीन ने हाल ही में अपनी पांचवीं राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्य योजना जारी की है, जिससे मानवाधिकारों के क्षेत्र में अपनी प्रगति के माध्यम से विश्व में मानवाधिकारों के विकास में स्थिरता और निश्चितता आई है। वर्तमान में, शिनच्यांग और शीत्सांग समृद्ध और स्थिर हैं, और हांगकांग निवासियों के वैध अधिकारों की गारंटी दी गई है। ‘राष्ट्रीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का कानून’ सभी जातीय समूहों के समान अधिकारों की गारंटी देने और सामान्य विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।
ली श्याओमेई ने ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और चेक गणराज्य सहित कुछ देशों द्वारा दिए गए झूठे बयानों का खंडन करते हुए, उनके द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघनों और उन के स्वयं के कार्यों पर पुनर्विचार करने से इनकार करने की ओर इशारा किया। चीन ने कुछ देशों से मानवाधिकारों का राजनीतिकरण और दुरुपयोग बंद करने तथा बहुपक्षीय मानवाधिकार तंत्रों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

