Friday, June 19, 2026
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राम मंदिर दान चोरी में शामिल लोगों पर कार्रवाई हो, सुप्रीम कोर्ट कराए निष्पक्ष जांच: रुचि वीरा

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मुरादाबाद, 19 जून (आईएएनएस) समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा ने राम मंदिर दान चोरी मामला, टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में कथित टूट, कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयानों और समाजवादी पार्टी के भीतर आयोजित एक बैठक को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा और पत्थर चोरी मामले को बेहद गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की। वहीं, भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के कई नेता और स्वयं ओम प्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं।

सांसद रुचि वीरा ने राम मंदिर दान और पत्थर चोरी विवाद को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह केवल चोरी का मामला नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। यह बहुत गंभीर मामला है। अयोध्या में सैकड़ों करोड़ रुपए की कीमत वाले पत्थर चोरी हो गए हैं। इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए, निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

सपा सांसद ने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे मंदिर प्रबंधन से जुड़े बताए जा रहे हैं। ऐसे में इसे सामान्य चोरी नहीं बल्कि “डकैती” की तरह देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशभर के लोगों ने भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए अपनी आस्था और भावना से चंदा दिया था, लेकिन यदि उस धन या सामग्री का दुरुपयोग हुआ है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के अलग रुख अपनाने और दलों में टूट की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए रुचि वीरा ने भाजपा पर विपक्षी दलों को कमजोर करने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा पार्टियों को तोड़ने और नेताओं को अपने पक्ष में करने में माहिर है। जहां जनता उन्हें नहीं चुनती, वहां वे राजनीतिक दलों को तोड़ने जैसी गतिविधियों का सहारा लेते हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी की स्थिति अलग है और इसकी तुलना किसी अन्य राज्य या दल से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को टीएमसी समझने की भूल न की जाए और उत्तर प्रदेश को बंगाल समझने की गलती भी नहीं होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर द्वारा उन्हें भाजपा में शामिल होने की सलाह दिए जाने पर रुचि वीरा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजभर के बयानों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है। सपा सांसद ने कहा कि ओपी राजभर की बातों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। ऐसा कुछ भी नहीं है। ये पूरी तरह बेबुनियाद बातें हैं और लोगों को इस तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि भाजपा के कई नेता समाजवादी पार्टी में आने की इच्छा रखते हैं। रुचि वीरा ने यहां तक कहा कि खुद ओम प्रकाश राजभर भी समाजवादी पार्टी में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं।

कुछ राजनीतिक चर्चाओं में उनके पार्टी से दूरी बनाने की अटकलों पर भी रुचि वीरा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी खुद को पार्टी से अलग नहीं किया और न ही ऐसा कोई कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि मैंने खुद को अलग नहीं किया है और न ही पार्टी से कोई दूरी बनाई है। जिस कार्यक्रम की चर्चा हो रही है, उसके आयोजकों ने न तो मेरी तस्वीर लगाई और न ही मुझे आमंत्रित किया। इसका मतलब यह नहीं कि मैंने खुद को अलग कर लिया है।

रुचि वीरा ने आगे कहा कि वह पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) अभियान के लिए लगातार काम कर रही हैं और दिन-रात शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों के बीच रहकर उनकी आवाज उठा रही हैं। जो लोग समाजवादी पार्टी में फूट की बात कर रहे हैं, वे अपने गुंगेरी लाल के हसीन सपने अपने तक ही रखें। मुझे अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी की एकजुटता पर पूरा भरोसा है।

रुचि वीरा ने समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा आयोजित एक बैठक पर भी सवाल उठाए और इसकी जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम के पीछे कुछ ऐसे लोग हैं जो पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के कुछ नेताओं ने इस बैठक को प्रायोजित किया था। इसमें कुछ लोग सामने हैं, कुछ पर्दे के पीछे हैं और कुछ लोग इसकी पूरी पटकथा लिख रहे हैं। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव से मांग की कि ऐसे लोगों की पहचान की जाए जो संगठन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को उनके मूल जिलों में वापस भेजा जाना चाहिए ताकि संगठन में अनुशासन बना रहे।