Monday, June 22, 2026
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ब्रिक्स एनएसए बैठक: अजित डोभाल और इथियोपिया के वरिष्ठ अधिकारी की मुलाकात, सहयोग बढ़ाने पर चर्चा

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नई द‍िल्‍ली, 22 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और इथियोपिया के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने ब्रिक्स एनएसए बैठक में दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर बताया, ”राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने सोमवार को 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की बैठक के दौरान इथियोपिया की राष्ट्रीय खुफिया और सुरक्षा सेवा (एनआईएसएस) के विश्लेषण विभाग के कार्यकारी निदेशक मिलियन लेमा टैडेसे से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने भारत-इथियोपिया रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत तथा गहरा बनाने के लिए सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की।”

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और ईरान के सुरक्षा प्रतिनिधि नेजामी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी ह‍िस्‍सा ले रहे हैं।

मंत्रालय ने बयान में कहा, “मीटिंग के दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार/प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ‘आज दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां’ थीम पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।”

यह मीटिंग इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत ब्रिक्स में ग्लोबल गवर्नेंस, सुरक्षा सहयोग और तकनीकी चुनौतियों पर बातचीत को आगे बढ़ा रहा है। ग्रुप ने आर्थिक मुद्दों से आगे बढ़कर सदस्य देशों पर असर डालने वाली रणनीति और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को भी शामिल करने पर अपना ध्यान तेजी से बढ़ाया है।

हाल के ईरान-संबंधी घटनाक्रमों और क्षेत्रीय तनावों के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। इसे सितंबर में भारत में होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिए भी अहम माना जा रहा है।

बैठक में सीमा-पार आतंकवाद, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, उभरते भू-राजनीतिक संकटों और ब्रिक्स देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

ईरान जनवरी 2024 से ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य है और हाल के वर्षों में समूह के भीतर उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली यह सुरक्षा बैठक सदस्य देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।