मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए कई बड़े संस्थागत सुधारों की घोषणा की। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार ड्रग्स तस्करी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान फडणवीस ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया मोहम्मद सलीम डोला उर्फ सलीम इस्माइल डोला की हालिया गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने ड्रग्स गिरोहों के खिलाफ कड़े महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (एमसीओसीए) का इस्तेमाल क्यों किया।
विपक्ष ने ड्रग्स मामलों में संगठित अपराध विरोधी कानून के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून के तहत कई बार गिरोहों के सरगना कानूनी खामियों का फायदा उठाकर जमानत हासिल कर लेते हैं और अपने सहयोगियों के जरिए धंधा जारी रखते हैं।
उन्होंने कहा, ”ड्रग्स तस्करी अब कोई छोटा-मोटा स्थानीय अपराध या सिर्फ नशे का मामला नहीं रह गया है। यह पूरी तरह संगठित और आर्थिक रूप से मजबूत नेटवर्क है, जो अंडरवर्ल्ड माफिया की तरह काम करता है।”
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई के लिए कई विभागों के बीच तालमेल जरूरी है। उन्होंने घोषणा की कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के पुलिस थानों में विशेष एंटी-ड्रग सेल और ड्रग जांच सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नगर निगमों और स्थानीय पुलिस को स्कूलों और कॉलेजों के 100 मीटर के दायरे में मौजूद अवैध दुकानें, खोखे और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। साइबर विभाग ड्रग्स की बिक्री के लिए इस्तेमाल होने वाले एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया चैनलों पर नजर रखेगा। वहीं शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग 3,000 शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाएंगे।
जनभागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने ऐसी सूचना देने वाले लोगों के लिए इनाम योजना शुरू की है, जो ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी देंगे। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
फडणवीस ने जनवरी से अप्रैल 2026 तक की कार्रवाई के आंकड़े भी साझा किए। इस अवधि में व्यावसायिक मात्रा में ड्रग्स से जुड़े 1,142 मामले दर्ज किए गए और 1,626 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 254.53 करोड़ रुपए मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए। इसके अलावा ड्रग्स सेवन से जुड़े 3,199 मामले भी दर्ज हुए।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की सभी सात इकाइयां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2025 में एएनटीएफ और स्थानीय पुलिस ने 523.17 करोड़ रुपए मूल्य के जब्त मादक पदार्थों को नष्ट किया था।
हालांकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग के कुछ लोग ड्रग्स तस्करों से मिले हुए हैं। जयंत पाटिल ने दावा किया कि कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा वसूली और रिश्वतखोरी के कारण ड्रग्स गिरोहों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने ऑनलाइन ड्रग्स तस्करी पर चिंता जताते हुए प्रमुख अंतरराज्यीय बंदरगाहों पर महाराष्ट्र पुलिस की टीम तैनात करने की मांग की।
जीतेंद्र अव्हाड ने आरोप लगाया कि बड़े स्तर पर ड्रग्स कारोबार संस्थागत सहयोग के बिना नहीं चल सकता। वहीं सुनील प्रभु ने कहा कि लोगों की लगातार शिकायतों के बावजूद ड्रग्स की बिक्री मोहल्लों तक फैल चुकी है।
पुलिस बल का बचाव करते हुए और जवाबदेही की जरूरत स्वीकार करते हुए फडणवीस ने कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा, ”जो भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्रग्स तस्करों के साथ मिलीभगत करते पाया जाएगा, उसे नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा। विभाग के भीतर ऐसे लोगों के लिए हमारी जीरो टॉलरेंस नीति है।”
पुलिस की वसूली और ड्रग्स गिरोहों से संबंधों के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जो पुलिसकर्मी ड्रग्स तस्करी को बढ़ावा देते या नजरअंदाज करते पाए जाएंगे, उन्हें केवल निलंबित नहीं बल्कि सेवा से बर्खास्त किया जाएगा।
उन्होंने मुंबई को नशामुक्त बनाने के लिए ‘ड्रग-फ्री मुंबई’ अभियान चलाने तथा शहर में जागरूकता कार्यक्रमों की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने की भी घोषणा की।

