Wednesday, June 24, 2026
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महाराष्ट्र सरकार वन्यजीवों के हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी देगी

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मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव को कम करने के लिए एक बड़े कदम के तौर पर, महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने मंगलवार को विधानसभा में घोषणा की कि राज्य सरकार ने जंगली जानवरों के हमले में मारे गए नागरिकों के परिजनों को पक्की सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव तैयार किया है।

इस फैसले को राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही तुरंत लागू कर दिया जाएगा।

मांसाहारी जानवरों को जंगल की सीमा के भीतर ही काफी शिकार मिल सके और वे इंसानी बस्तियों में न भटकें, इसके लिए एक अनोखा कदम उठाते हुए मंत्री नाइक ने घोषणा की कि राज्य पोल्ट्री फार्म की तर्ज पर खरगोश फार्म भी बनाएगा। इसके अलावा, सरकार हिरण की प्रजातियों की ब्रीडिंग (प्रजनन) को तेजी से बढ़ाएगी।

ये घोषणाएं विधायकों अतुल भातखलकर, सुधीर मुनगंटीवार और अन्य लोगों द्वारा वन्यजीवों के हमलों, खासकर चंद्रपुर जिले की हालिया घटना, जिसमें तेंदू के पत्ते इकट्ठा कर रही चार महिलाओं की बाघ के हमले में मौत हो गई थी, के बढ़ते मामलों पर लाए गए ‘ध्यान-आकर्षण प्रस्ताव’ पर चर्चा के दौरान की गईं।

मंत्री के अनुसार, पूरे राज्य में 55 लोगों की मौत की सूचना मिली है। सरकार ने 10 अति-संवेदनशील जिलों की पहचान की है। सरकार ने 260 करोड़ रुपए की कार्ययोजना को मंजूरी दी है।

इन घटनाओं की बारंबारता पर चिंता जताते हुए भातखलकर ने कहा कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव अब कभी-कभार होने वाली घटना नहीं रही, बल्कि लगभग रोजाना का संकट बन गई है।

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सामाजिक-आर्थिक अंतर की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां अमीर पर्यटक बाघों की एक झलक पाने के लिए हजारों रुपए खर्च करते हैं, वहीं जंगल के किनारे रहने वाले गरीब स्थानीय लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

वडेट्टीवार ने मांग की कि अतिरिक्त बाघों को दूसरी जगह भेजा जाए और शीर्ष शिकारियों की संख्या जंगल की वास्तविक क्षमता के अनुरूप हो।

इन मांगों के जवाब में, वन मंत्री नाइक ने राज्य में तेजी से बढ़ती वन्यजीव आबादी को संतुलित करने के लिए एक व्यापक विस्तार रणनीति की रूपरेखा पेश की। मौजूदा रिजर्व पर दबाव कम करने के लिए नासिक में 5,500 हेक्टेयर में फैला तडोबा-शैली का एक नया वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा।

अगले 42 महीनों में, लगभग 450 बाघों को व्यवस्थित रूप से दूसरी जगहों पर बसाने के लिए कई नए अभयारण्य स्थापित किए जाएंगे। वन्यजीवों को इंसानी बस्तियों में घुसने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर बांस के पेड़ लगाकर ‘बायो-फेंस’ (प्राकृतिक बाड़) बनाई जाएगी।

मंत्री नाइक ने कहा कि पालघर, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, कोल्हापुर और मराठवाड़ा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने में अफसरशाही की वजह से होने वाली देरी का मुद्दा उठाया।

उन्होंने बताया कि 30 दिन की समय-सीमा होने के बावजूद, वित्त विभाग से फंड जारी होने में देरी के कारण परिवारों को अक्सर समय पर पैसे नहीं मिल पाते हैं।

इस बाधा को दूर करने के लिए, मुनगंटीवार ने ‘नेगेटिव ऑथराइजेशन’ सिस्टम लागू करने की मांग की। मंत्री नाइक ने यह मांग मान ली और घोषणा की कि अब आपातकालीन राहत फंड सीधे जिला कलेक्टर के स्तर पर उपलब्ध होंगे, ताकि बिना किसी प्रशासनिक देरी के पीड़ित परिवारों तक मुआवजा पहुंच सके।