Wednesday, June 24, 2026
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बिना टैक्स बढ़ोतरी के राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही पश्चिम बंगाल सरकार

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कोलकाता, 24 जून (आईएएनएस)। सुवेंदु अधिकारी सरकार ने लोगों पर अधिक टैक्स का बोझ डाले बिना पश्चिम बंगाल के अपने टैक्स रेवेन्यू को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए टैक्स कलेक्शन में कमियों को दूर करना बहुत जरूरी है।

राज्य के वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि भले कई लोग कह रहे हैं कि राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता की ओर से पेश 2026-27 के बजट प्रस्तावों में राज्य के टैक्स रेवेन्यू को बेहतर बनाने के लिए कोई खास दिशा-निर्देश नहीं थे, लेकिन राजस्व वृद्धि का रहस्य उन फैसलों में छिपा है जो नई कैबिनेट के कार्यभार संभालने के पहले दिन से लिए गए थे।

सरकार के फैसलों का प्रभाव दिखाई भी देने लगा और कुछ टैक्स दरों के तहत कलेक्शन में सुधार हुआ है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पत्थर खदानों और बालू खनन व्यवसाय में कर संग्रहण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। इसके लिए ई-चालानों में होने वाली धोखाधड़ी की संभावना को समाप्त किया जा रहा है, जो पिछले तृणमूल कांग्रेस शासनकाल में व्यापक रूप से प्रचलित थी।

राज्य के वित्त विभाग के अधिकारी ने कहा कि ई-चालान धोखाधड़ी के सिस्टम में शामिल सरकारी अधिकारियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और उनकी जगह बेदाग और ईमानदार अधिकारियों को लाया जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, नदी के तल से बालू ले जाने वाले ट्रकों को विभिन्न चेक-पोस्टों पर ये ई-चालान जारी किए जाते हैं।

ऊपरी तौर पर इन ई-चालानों में कुछ भी संदिग्ध नहीं दिखता था, लेकिन बाद में यह पता चला कि इन चालानों को तैयार करने में धोखाधड़ी की जाती थी। इसके परिणामस्वरूप खनन और व्यापार से जुड़े संचालक राज्य सरकार को सही टैक्स का भुगतान करने से बच जाते थे और उसकी जगह भ्रष्ट अधिकारियों को रिश्वत के रूप में अनौपचारिक भुगतान कर देते थे।

राज्य के वित्त विभाग के अधिकारी ने कहा, “अब ऐसी कमियों को दूर करने से एक तीर से दो निशाने लगेंगे। एक तरफ सिस्टम में रिश्वत के रूप में अवैध वसूली का सिलसिला खत्म हो जाएगा और साथ ही राज्य के अपने टैक्स सिस्टम में रेवेन्यू का प्रवाह अपने आप बढ़ जाएगा।”

दरअसल, मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से पेश आंकड़ों ने यह संकेत दिया कि खामियों को दूर करने की प्रक्रिया पहले ही राज्य के खजाने के लिए अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करने लगी है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्य रूप से बीरभूम जिले में स्थित पत्थर की खदानों से राज्य सरकार की कमाई औसतन 60 करोड़ रुपए के आसपास थी। हालांकि, 9 मई को नई कैबिनेट के कार्यभार संभालने के बाद से अब तक इसी स्रोत से प्राप्त राजस्व बढ़कर 83 करोड़ रुपए हो गया है।

राज्य सरकार के अनुसार, ये आंकड़े इस बात का उदाहरण हैं कि जनता पर अधिक कर-दरें थोपे बिना भी कर संग्रहण प्रणाली की खामियों को दूर करके राज्य का अपना कर-राजस्व बढ़ाया जा सकता है।

विधानसभा में 22 जून को बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने भी एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी, जो पश्चिम बंगाल में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यवसाय करने में सुगमता) सुनिश्चित करने से जुड़ी थी। इसके तहत 100 करोड़ रुपए या उससे अधिक के सभी निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार की ‘सिंगल-विंडो प्रणाली’ के माध्यम से सभी जरूरी मंजूरियां प्रदान की जाएंगी। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों से अलग-अलग अनुमतियां लेने की परेशानी से राहत मिलेगी।

वित्त विभाग के अधिकारी के अनुसार, इस नीति का मुख्य उद्देश्य निश्चित रूप से व्यवसाय करने में सुगमता बढ़ाना है, लेकिन इसके माध्यम से मंजूरी प्रक्रिया से जुड़ी रिश्वतखोरी को समाप्त करने की भी पर्याप्त संभावना है।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “अतीत में विभिन्न विभागों से अलग-अलग मंजूरियां प्राप्त करने की व्यवस्था में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन जब सभी मंजूरियां ‘सिंगल-विंडो प्रणाली’ के माध्यम से दी जाएंगी, तो भ्रष्टाचार की ऐसी संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी। नए उद्यमी सिर्फ वैध शुल्क का भुगतान करके अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे, जिससे राज्य के अपने राजस्व संग्रहण में भी वृद्धि होगी।”