नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। भारत में पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों में काफी तेज और आसान हो गई है। सरकार के नए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में देश में करीब 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं दी गईं, जिनमें 1.39 करोड़ पासपोर्ट जारी किए गए।
हर वर्ष 24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस पर विदेश विभाग के अधिकारियों ने डिजिटल युग में हुए सुधार की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि अब पासपोर्ट बनवाने में पहले जितना समय नहीं लगता। औसतन सिर्फ छह कार्य दिवसों में पासपोर्ट जारी हो जाता है (पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर)। साथ ही, पासपोर्ट सेवा केंद्रों (पीएसके) और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों (पीओपीएसके) में लोगों का समय भी काफी बच गया है। अब एक आवेदक का काम औसतन 45 मिनट से भी कम समय में पूरा हो जाता है।
देशभर में पासपोर्ट केंद्रों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। आज भारत में 545 पासपोर्ट केंद्र काम कर रहे हैं, जबकि करीब दस साल पहले यह संख्या सिर्फ 77 थी। यानी सुविधा का दायरा कई गुना बढ़ गया है। पिछले साल 10 नए केंद्र खोले गए और इस साल भी 10 और खोलने की योजना है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की माने तो विदेश यात्रा के मामले में भी भारतीय पासपोर्ट की ताकत बढ़ी है। अब 27 देश भारतीय नागरिकों को बिना वीजा प्रवेश देते हैं, जबकि 47 देश वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा देते हैं और 66 देश ई-वीजा की सुविधा प्रदान करते हैं।
सरकार ने कई देशों, खासकर यूरोप के देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं जिससे छात्रों, शोधकर्ताओं, टूरिस्ट और बिजनेस से जुड़े लोगों को यात्रा में आसानी हो। साथ ही, अवैध प्रवास पर भी नियंत्रण के लिए इन देशों के साथ औपचारिक व्यवस्था बनाई गई है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बुधवार को एक्स के जरिए समस्त देशवासियों और पासपोर्ट अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। एक ओपन लेटर के जरिए 545 पासपोर्ट केंद्रों, पासपोर्ट की बढ़ती तादाद, और पीएम मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांत का उल्लेख किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “ई-पासपोर्ट और पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम 2.0 जैसी पहल भारत की आधुनिक, डिजिटल और सशक्त प्रशासनिक व्यवस्था का सशक्त प्रमाण हैं। नागरिकों को सरल एवं गुणवत्तापूर्ण पासपोर्ट सेवाएं प्रदान करने का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।”

