Wednesday, June 24, 2026
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सरकार सर्विस सेक्टर की ग्रोथ पर नजर रखने के लिए जुलाई में लॉन्च करने जा रही मंथली प्रोडक्शन इंडेक्स

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नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने बुधवार को कहा कि वह औपचारिक सेवा क्षेत्र की वृद्धि में होने वाले अल्पकालिक बदलावों को मासिक आधार पर मापने के लिए जुलाई 2026 में इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (आईएसपी) लॉन्च करेगा। मंत्रालय ने उपयोगकर्ताओं की सहायता के लिए इससे जुड़ी एक विस्तृत एफएक्यू यानी प्रश्न पुस्तिका भी जारी की है।

एफएक्यू में बताया गया है कि इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (आईएसपी) एक अल्पकालिक संकेतक है, जिसे किसी निर्धारित आधार अवधि की तुलना में सेवा क्षेत्र के उत्पादन में समय के साथ होने वाले बदलावों को मापने के लिए तैयार किया गया है।

यह सेवा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों के वास्तविक उत्पादन (रियल आउटपुट) में समय के साथ होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है।

आईएसपी, इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) की तरह काम करेगा, लेकिन यह औपचारिक सेवा क्षेत्र को मासिक आधार पर कवर करेगा। इससे सेवा क्षेत्र की गतिविधियों और प्रदर्शन पर नियमित और त्वरित जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

मंत्रालय के अनुसार, सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण ताकत बन चुका है। वर्ष 2013-14 से यह देश के सकल मूल्य वर्धन (ग्रॉस वैल्यू एडेड) में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान दे रहा है।

सेवा क्षेत्र के बढ़ते महत्व और संभावनाओं को देखते हुए तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप भारत को एक ऐसे अल्पकालिक संकेतक की आवश्यकता थी, जो इस क्षेत्र की वृद्धि को नियमित रूप से माप सके।

इससे योजनाकारों और नीति निर्माताओं को समय पर उचित कदम उठाने और सेवा क्षेत्र की विकास दिशा तय करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने बताया कि आईएसपी का एक प्रमुख उद्देश्य अर्थव्यवस्था की अल्पकालिक गतिविधियों को समझने के लिए आईआईपी के साथ पूरक आर्थिक संकेतक उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा, सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन से जुड़ी उच्च आवृत्ति (हाई-फ्रीक्वेंसी) जानकारी उपलब्ध कराकर मौजूदा सांख्यिकीय ढांचे को मजबूत करना भी इसका उद्देश्य है, ताकि नीति निर्माण और आर्थिक विश्लेषण को बेहतर समर्थन मिल सके।

आईएसपी सेवा क्षेत्र के उद्योगों के प्रदर्शन की समय पर जानकारी उपलब्ध कराएगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों की निगरानी और अधिक प्रभावी होगी और तथ्यों पर आधारित नीतिगत निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

यह सेवा क्षेत्र की वृद्धि का एक हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक भी होगा और समय-शृंखला (टाइम सीरीज) डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे आर्थिक पूर्वानुमान और व्यापार चक्र (बिजनेस साइकिल) के विश्लेषण को बेहतर बनाया जा सकेगा।