Thursday, June 25, 2026
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‘नाटो के सहयोगियों ने अमेरिका को किया निराश’, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो चीफ रूटे से कहा

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वाशिंगटन, 25 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ लड़ाई के दौरान कई नाटो सहयोगियों ने हमें निराश किया। ट्रंप ने कहा कि हालांकि अमेरिका को सैन्य मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन अपने साझेदारों से ज्यादा वफादारी की उम्मीद है।

अंकारा में अगले महीने नाटो समिट होने जा रहा है। नाटो समिट से पहले बुधवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के मामले में मजबूती से कार्रवाई की है, लेकिन कुछ यूरोपीय साथियों के जवाब से वह निराश हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हमें निराश किया गया। हमें इस मामले में बिल्कुल भी मदद की जरूरत नहीं थी। हमने उन्हें पहले हफ्ते में ही हरा दिया, लेकिन अच्छा होता अगर उन्होंने कहा होता, ‘हम मदद करना चाहेंगे।'”

उन्होंने कई सहयोगियों का नाम लेते हुए कहा, “मैं इटली से निराश था। मैं ब्रिटेन से निराश था। हम जर्मनी और फ्रांस से निराश थे। हम उनमें से ज्यादातर से निराश थे।”

रूटे ने माना कि कुछ मामलों में निराशा की वजह थी, लेकिन उन्होंने कहा कि वे अलग-अलग मामले थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोपीय देशों ने वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय अरेंजमेंट के जरिए जरूरी लॉजिस्टिक समर्थन दिया था।

रूटे ने कहा, “मेरा मानना है कि अमेरिका के लिए यूरोप को पावर प्रोजेक्शन प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल किए बिना ईरान पर हमला करना बहुत मुश्किल होता।” उन्होंने कहा कि लड़ाई के दौरान यूरोपीय एयर बेस से 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमान ने उड़ान भरी थी।

ट्रंप ने नाटो सदस्यों पर रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए भी दबाव डाला। उन्होंने कहा, “बड़ा सवाल यह है कि क्या वे पांच फीसदी दे रहे हैं? वे छह महीने पहले, पांच फीसदी देने पर सहमत हुए थे और ज्यादातर वे दे नहीं रहे हैं।”

रूटे ने अलायंस की बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि जर्मनी, पोलैंड, डेनमार्क, बाल्टिक देश और दूसरे साथी देश रक्षा बजट में तेजी से बढ़ोतरी कर रहे हैं। उन्होंने यूरोप और कनाडा में सैन्य खर्च बढ़ाने का क्रेडिट ट्रंप के नेतृत्व को दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका की अपने सहयोगियों से पहली उम्मीद वित्तीय समर्थन नहीं थी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “मुझे बस उनकी वफादारी चाहिए। हमें उनके पैसे की जरूरत नहीं है, हमें किसी चीज की जरूरत नहीं है। हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, लेकिन मुझे बस वफादारी चाहिए।”

रूटे ने ईरान संकट से निपटने के ट्रंप के तरीके की सराहना की और कहा कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना वैश्विक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। रूटे ने कहा, “मैं सच में यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि आप ईरान में जो कर रहे हैं, वह कितना जरूरी है। ईरान के पास परमाणु क्षमता होना पूरी दुनिया के लिए खतरा होगा।”

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “ईरान के साथ हमारी बातचीत बहुत अच्छी चल रही है।” इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी यह कहा कि ईरान बहुत बड़ी रियायतें दे रहा है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भविष्य में ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग पर शुल्क लगाने की इजाजत देने वाले किसी भी समझौते को स्वीकार करेंगे, तो ट्रंप ने जवाब दिया, “यह मुझे मंजूर नहीं होगा, मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगा।”

राष्ट्रपति ने अंकारा में नाटो समिट से पहले तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के बारे में भी गर्मजोशी से बात की।

ट्रंप ने कहा, “वह मेरे दोस्त हैं। वह तुर्किए से प्यार करते हैं और वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।”

एफ-35 फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए तुर्किए की लंबे समय से पेंडिंग रिक्वेस्ट पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि सरकार यह समीक्षा कर रही है कि क्या सभी कानूनी जरूरतें पूरी हुई हैं।

उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा, “हम इस बात की पुष्टि करने की प्रक्रिया में हैं कि सभी आवश्यक शर्तें पूरी की गई हैं। यह मूल रूप से कांग्रेस से जुड़ा मामला है और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि तुर्किए ने अमेरिकी कानून का पालन किया है।”

यूक्रेन को लेकर पूछे गए सवाल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और मजबूती से डटे हुए हैं। उन्होंने जेलेंस्की को साहसी नेता भी बताया।

नाटो समिट का आयोजन 7-8 जुलाई को अंकारा में हो रहा है। इस समिट में पिछले साल हुए समझौते को लागू करने पर फोकस रहने की उम्मीद है, जिसमें सहयोगी देश 2035 तक जीडीपी का 5 फीसदी रक्षा और सुरक्षा पर निवेश करने के लिए काम करेंगे, साथ ही रक्षा औद्योगिक उत्पादन को मजबूत करेंगे और यूक्रेन को लगातार समर्थन देंगे। नाटो नेताओं ने यह भी कहा है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथिया हासिल नहीं करना चाहिए।