Friday, June 26, 2026
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27 जून का पंचांग: अत्यंत उत्तम होगा शनि प्रदोष व्रत, दोपहर 12:16 से 12:56 बजे तक करें शुभ काम

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नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है; यह सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है।

27 जून 2026 (शनिवार) को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि है, जो रात 12:43 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। सुबह 10:29 से 12:17 बजे तक अमृत काल रहेगा और सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। इस दिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस दिन शनि प्रदोष व्रत पड़ रहा है। यह दिन भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है।

इस दिन सुबह 5:47 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 5:17 बजे चन्द्रोदय और रात 3:58 बजे चन्द्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं। चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में स्थित रहेगा और इस दिन चंद्रमा की राशि धनु होगी।

वहीं, 27 जून 2026 (शनिवार) को हर्षण योग नहीं, बल्कि साध्य योग प्रभावी रहेगा। वैदिक पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को कोई वज्र योग नहीं है।

कोई भी महत्वपूर्ण कार्य अभिजित मुहूर्त में दोपहर 12:16 से 12:56 बजे तक करने से काफी शुभ रहेगा। यह दिन के मध्य का सबसे शुभ और शक्तिशाली समय माना जाता है, जिसमें किसी भी नए कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ या महत्वपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत फलदायी होता है।

वहीं, राहुकाल सुबह 09:21 बजे से सुबह 11:02 बजे तक रहेगा, गुलिक काल 06:00 से 07:41 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 02:23 से 04:04 तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है।

वहीं, इस दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। साथ ही, 27 जून 2026 (शनिवार) को पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना आवश्यक भी है तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए।